नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के सामूहिक बलात्कार के एक मामले के दोनों आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि पीड़िता का बयान बिल्कुल ही विश्वास करने योग्य नहीं है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कादंबरी अवस्थी ने मामले के आरोपियों -- सागर और निखिल -- के खिलाफ मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
अदालत ने 30 मई को जारी आदेश में कहा, 'यह भी साबित होता है कि शिकायतकर्ता महिला का बयान बिल्कुल विश्वास करने योग्य नहीं है, क्योंकि इसमें विरोधाभास, बातें छिपाना, बाद में उनमें बदलाव करना, बढ़ा-चढ़ाकर बताना और विसंगतियां हैं। इसलिए, यह बयान विश्वास योग्य नहीं है।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 22 अक्टूबर 2020 को दोनों आरोपियों ने नागरिक सुरक्षा विभाग में उसका तबादला कराने के बहाने उसे एक अतिथिगृह में ले जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि एक आरोपी ने होटल के कमरे में महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया, जबकि दूसरे ने बाद में उसका यौन उत्पीड़न किया। यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने इस घटना के बारे में किसी को बताने की स्थिति में महिला को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी।
मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों से जिरह की, जिनमें शिकायतकर्ता, होटल के कर्मचारी, पुलिस अधिकारी और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल थे।
भाषा
शुभम सुभाष
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