तिरुपति, 15 जून (भाषा) तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने अपने खाद्य प्रबंधन तंत्र में वैज्ञानिक मानकों को शामिल करने के लिए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्-केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिक अनुसंधान संस्थान, मैसुरु (सीएसआईआर-सीएफटीआरआई) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी खाद्य सामग्री और प्रसाद उच्चतम गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों पर खरे उतरें।
सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह समझौता सुरक्षा, पोषण और गुणवत्ता के सबसे उच्च मानकों का पालन करते हुए टीटीडी के भोजन और प्रसाद की पारंपरिक विशेषता को बनाए रखेगा।
विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘टीटीडी द्वारा तैयार और वितरित किए जाने वाले श्रीवारु (देवता) के सभी भोजन और पवित्र प्रसाद सुरक्षा, पोषण और गुणवत्ता के सबसे उच्च मानकों को पूरा करें और साथ ही उनकी पारंपरिक विशेषता भी बनी रहे, इस नेक मकसद के साथ टीटीडी ने अपने खाद्य प्रबंधन तंत्र में वैज्ञानिक तरीकों को शामिल करने के लिए सीएसआईआर-सीएफटीआरआई, मैसूर के साथ एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।’’
यह साझेदारी सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने, प्रणालियों को आधुनिक बनाने, प्रसाद की पारंपरिक विशेषता को बनाए रखने, क्षमता निर्माण और विशेषज्ञों को शामिल करने पर केंद्रित है।
सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने के तहत संयुक्त टीम खरीद, तैयारी और वितरण के लिए सख्त गुणवत्ता-नियंत्रण मानक, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और निगरानी प्रणालियां विकसित और लागू करेंगी।
प्रणालियों के आधुनिकीकरण के तहत, सीएसआईआर-सीएफटीआरआई भंडारण, परीक्षण और खरीद प्रक्रियाओं को उन्नत बनाने संबंधी सलाह देगा। साथ ही, संदूषण के जोखिम को कम करने और गुणवत्ता में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तकनीकों तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों की सिफारिश करेगा।
प्रसाद के संरक्षण के लिए अनुसंधान-आधारित पैकेजिंग और शेल्फ-लाइफ बढ़ाने संबंधी उपाय विकसित किए जाएंगे, ताकि उसकी स्थिरता और भंडारण अवधि बढ़ाई जा सके, जबकि उसके पारंपरिक स्वाद, बनावट और सांस्कृतिक महत्व से कोई समझौता न हो।
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सुरभि सुरेश
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