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उत्तराखंड: आदिवासी संगठन ने ओम पर्वत के निकट शिवलिंग स्थापित करने पर रोक लगाई

पिथौरागढ़, 15 जून (भाषा) उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में व्यांस घाटी के एक गांव में रहने वाले रंग समुदाय ने सोमवार को ओम पर्वत के सामने तीन टन वजन वाले शिवलिंग और नंदी की स्थापना की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

समुदाय के सदस्यों का कहना है कि वे प्रकृति उपासक हैं और अपनी भूमि पर किसी भी कृत्रिम संरचना की स्थापना की अनुमति नहीं देते।

रंग उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र की सीमावर्ती घाटियों में रहने वाला एक आदिवासी समुदाय है, जो प्रकृति उपासना की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है।

खुद को सनातन धर्म के प्रसार के लिए कार्यरत संगठन बताने वाले आदि कैलाश 20-20 ट्रस्ट ने इस क्षेत्र में शिवलिंग स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था।

व्यांस घाटी में धार्मिक मूर्तियों को 'बिना अनुमति' लाए जाने पर रंग कल्याण संस्था की ओर से आपत्ति जताए जाने के बाद स्थानीय प्रशासन ने हस्तक्षेप किया।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ट्रस्ट ने स्थानीय आदिवासी समुदाय से बात किए बिना और स्थानीय पंचायत से अनुमति लिए बगैर तीन टन वजन के शिवलिंग और नंदी को धारचूला से 27 किलोमीटर आगे गर्बाधार तक पहुंचा दिया।

व्यांस, दारमा और चौदांस घाटियों के निवासी रंग समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली रंग कल्याण संस्था, धारचूला के अध्यक्ष प्रकाश गुंजियाल ने कहा कि यह स्थापना उनकी मान्यता का उल्लंघन है, जिसके अनुसार वे भगवान शिव की केवल प्राकृतिक स्वरूप में पूजा करते हैं।

गुंजियाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए आरोप लगाया कि यह समूह बिना अनुमति शिवलिंग स्थापित करने आया था।

उन्होंने कहा कि समुदाय अपनी मान्यताओं के उल्लंघन के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा, खासकर इस वर्ष, जब व्यांस घाटी में 'जुमली ह्या सामो' नामक प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव मनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हर 12 वर्ष में एक बार 'जुमली ह्या सामो' आयोजित किया जाता है।

आदिवासी संगठन के प्रमुख के अनुसार, जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि समूह स्थानीय लोगों से अनुमति लेना आवश्यक नहीं समझते हुए गर्बाधार पहुंच गया है, उन्होंने प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई।

उन्होंने कहा कि इसके बाद प्रशासन ने मूर्तियां लेकर जा रहे वाहन को वापस धारचूला बुला लिया।

गुंजियाल ने कहा, 'भविष्य में भी हम अपनी भूमि पर किसी भी कृत्रिम संरचना की स्थापना की अनुमति नहीं देंगे।'

धारचूला के उप-जिलाधिकारी आशीष जोशी ने कहा कि प्रशासन ने वाहन को वापस धारचूला बुला लिया, क्योंकि समूह ने संबंधित ग्राम सभा और रंग समुदाय से अनुमति नहीं ली थी।

उन्होंने कहा, 'यह रंग समुदाय और संबंधित ट्रस्ट के बीच का मामला है। जब तक संबंधित ग्राम सभा और आदिवासी संगठन सहमति नहीं देते, प्रशासन ट्रस्ट को अनुमति नहीं दे सकता।'

स्थापना के लिए ट्रस्ट के चार सदस्य जयपुर से पहुंचे थे।

ट्रस्टी भरत जोशी ने कहा कि वह इन मूर्तियों को 'सनातन धर्म के प्रचार' के अपने प्रयासों के तहत यहां लाए थे।

उन्होंने कहा कि अनुमति प्राप्त करने के लिए बातचीत जारी है और यदि सोमवार रात तक अनुमति नहीं मिलती है तो वे वापस लौट जाएंगे।

भाषा जोहेब रंजन

रंजन