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तृणमूल के बागी सांसदों के मामले में कानूनी राय ले सकते हैं बिरला

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के 'नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में प्रस्तावित विलय के बाद उन्हें अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर कानूनी राय ले सकते हैं। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि टीएमसी के बागी सांसदों की मांग पर कोई भी फैसला संसद के मानसून सत्र से पहले किया जाएगा, जो सामान्यतः जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।

उन्होंने कहा कि बागी सांसदों की मांग पर निर्णय केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर लिया जाएगा।

मंत्रालय किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से परामर्श के बाद अपनी राय देगा।

सूत्रों के अनुसार, लिखित कानूनी राय ली जाएगी ताकि यदि लोकसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय को अदालत में चुनौती दी जाती है तो वह न्यायिक जांच-परख की कसौटी पर खरा उतर सके।

इस बीच, लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ पी. डी. टी. आचारी ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर सकता है, केवल सांसद या विधायक ऐसा नहीं कर सकते।

आचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यदि किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व दूसरे राजनीतिक दल में विलय का फैसला करता है, तो उसके सांसदों और विधायकों को उस विलय से सहमत होना होता है, लेकिन केवल सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते। संविधान में यही प्रावधान है।’’

निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने टीएमसी के बागी सांसदों की एनसीपीआई में विलय की मौजूदा योजना को ‘‘नया प्रयोग’’ बताया।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था का उल्लेख न तो दलबदल विरोधी कानून में है और न ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में है।

टीएमसी के बागी सांसदों ने रविवार को एनसीपीआई में विलय की घोषणा की थी और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की थी।

बिरला से मुलाकात के बाद बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संवाददाताओं से कहा था कि टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

उन्होंने कहा था, ‘‘टीएमसी के दो-तिहाई सांसदों ने अध्यक्ष को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए पत्र दिया है। हम एनसीपीआई में विलय करेंगे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करेंगे।’’

भाषा हक प्रशांत

प्रशांत