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अंतर-जातीय दंपति को राहत, न्यायालय ने अभिभावकों को मिलने की अनुमति देने वाले फैसले पर रोक लगाई

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने “झूठी शान के लिए हत्या होने” के डर से जूझ रहे अंतर-जातीय दंपति को राहत देते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय के उस फैसले पर सोमवार को रोक लगा दी, जिसके तहत महिला के माता-पिता को उनसे (दंपति) मिलने की अनुमति दे दी गई थी।

न्यायमूर्ति उज्ज्ल भुइयां और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने दंपति की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया।

इससे पहले, दंपति ने महिला के रिश्तेदारों से जान का खतरा होने की शिकायत की थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया था।

पीठ ने कहा, “हमें इस तरह के दकियानूसी तत्वों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। वे दंपति को परेशान कर रहे हैं। यह सही नहीं है।”

पीठ ने राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दी।

सुनवाई के दौरान महिला के अभिभावकों की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उच्च न्यायालय का मकसद सिर्फ महिला और उसके पिता के बीच मुलाकात करवाना था, न कि उस सुरक्षा को कम करना, जो इस जोड़े को दी गई है।

वहीं, दंपति के वकील ने शिकायत की कि राजस्थान पुलिस के कर्मी लगातार उनके घर के बाहर तैनात रहते हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामलों के सिलसिले में उनके रिश्तेदारों के पास आते-जाते रहते हैं।

वकील ने कहा, “मेरे मुवक्किलों को सुरक्षा तो मिल गई है, लेकिन राजस्थान पुलिस के कर्मी उनके घर में बैठे रहते हैं।”

राजस्थान सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ को भरोसा दिलाया कि दंपति के घर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी अब उनसे मिलने नहीं जाएंगे।

पीठ ने यह बयान रिकॉर्ड में लिया और दंपति की याचिका पर राजस्थान सरकार से जवाब तलब किया।

शीर्ष अदालत ने 30 अप्रैल को उत्तर प्रदेश सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड में लिया था कि वह दंपति को सुरक्षा मुहैया कराएगी।

इसी के साथ न्यायालय ने उस याचिका का निपटारा कर दिया था, जिसमें दंपति ने झूठी शान के लिए हत्या होने के डर से सुरक्षा प्रदान किए जाने का अनुरोध किया था।

शीर्ष अदालत ने कहा था, “चौथे प्रतिवादी-उत्तर प्रदेश राज्य-के वकील ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस के कर्मचारी दूसरे वादी के घर (जो पहले वादी की ससुराल भी है) गए थे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वादियों की सुरक्षा के मामले में किसी भी आपात स्थिति में सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।”

न्यायालय ने दंपति को उत्तर प्रदेश के बागपत में युवक के माता-पिता के घर में रहने की इजाजत दे दी थी।

भाषा पारुल प्रशांत

प्रशांत