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अप्रैल में देश का चालू खाता 4.7 अरब डॉलर के अधिशेष में रहाः आरबीआई

मुंबई, 15 जून (भाषा) भारत का चालू खाता अप्रैल माह में 4.7 अरब डॉलर के अधिशेष में रहा जबकि एक साल पहले के समान माह में यह 4.8 अरब डॉलर के घाटे में था। मुख्य रूप से सेवाओं का निर्यात बढ़ने और विदेश से मिलने वाली रकम में बढ़ोतरी से ऐसा हुआ।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से सोमवार को भुगतान संतुलन (बीओपी) के बारे में जारी प्रारंभिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में आयात खर्च बढ़कर 72.5 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 65.8 अरब डॉलर था। वहीं, इस महीने में निर्यात 44.6 अरब डॉलर रहा, जो अप्रैल, 2025 में 38.7 अरब डॉलर था।

हालांकि, वस्तु व्यापार घाटा अप्रैल, 2026 में बढ़कर 27.9 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 27.1 अरब डॉलर था।

आलोच्य अवधि में सेवा क्षेत्र से शुद्ध प्राप्तियां बढ़कर 18.6 अरब डॉलर हो गईं, जो अप्रैल, 2025 में 15.9 अरब डॉलर थीं। इस दौरान सेवाओं का निर्यात 37 अरब डॉलर और आयात 18.4 अरब डॉलर रहा।

इसके अलावा, विदेशों से भेजी गई शुद्ध राशि भी बढ़कर 16 अरब डॉलर हो गई जो एक साल पहले 9.4 अरब डॉलर थी।

पूंजी खाते में अप्रैल, 2026 के दौरान शुद्ध बहिर्वाह (देश में आने वाली रकम से अधिक रकम बाहर) 11.3 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 5.3 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ था।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़कर 7.4 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 1.6 अरब डॉलर था। वहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के तहत 8.7 अरब डॉलर का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया गया।

कुल मिलाकर, भुगतान संतुलन अप्रैल, 2026 में 6.6 अरब डॉलर के घाटे में रहा, जबकि अप्रैल, 2025 में 50 करोड़ डॉलर का अधिशेष था।

इसके साथ ही आरबीआई ने कहा कि अब भुगतान संतुलन के आंकड़े संबंधित महीने के करीब दो महीने बाद 15 तारीख तक जारी कर दिए जाएंगे।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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