नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जताई, जिसमें केंद्र सरकार को ऐसी योजना बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जिसके तहत यदि 'सबवेंशन योजना’ के तहत खरीदारों को फ्लैट नहीं मिलते हैं, तो वितरित की गई ऋण राशि का समान नुकसान कर्जदाता और बिल्डर दोनों को उठाना चाहिए।
‘सबवेंशन योजना’ के तहत बैंक मंजूर की गई ऋण राशि सीधे बिल्डरों के खाते में भेजते हैं। इसके बाद बिल्डर की जिम्मेदारी होती है कि वह खरीदार को फ्लैट सौंपे जाने तक उस ऋण की मासिक किस्तें चुकाए, लेकिन जब बिल्डर त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार बैंकों को ईएमआई देना बंद कर देते हैं, तो बैंक यह राशि फ्लैट खरीदारों से मांगने लगते हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में भी मांग की गई है कि रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं के खरीदारों के लिए एक व्यवस्थित ऋण-राहत योजना बनाई जाए और निर्माण की प्रगति के अनुसार ऋण राशि जारी करने का नियम सुनिश्चित किया जाए।
न्यायालय एक फ्लैट खरीदार की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने आरोप लगाया था कि उसे बुक किया गया फ्लैट नहीं मिला, लेकिन फिर भी ईएमआई चुकाने के लिए मजबूर किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि वित्तीय संस्थान ‘सबवेंशन योजना’ के नियमों का पालन नहीं कर रहे।
याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पीठ ने कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं की जाए।
याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि यदि ‘सबवेंशन योजना’ के तहत खरीदार को फ्लैट या संपत्ति उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो बैंक और बिल्डर दोनों को, जारी किए गए पूरे ऋण की राशि का बराबर नुकसान उठाना चाहिए।
भाषा जोहेब दिलीप
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