Breaking News

‘ममता को पूर्व CM जैसी सुरक्षा मिलेगी’, PSO हटाए जाने पर बोले BJP MLA असीम सरकार     |   MP: ‘गरुडास्त्र’ लॉन्ग-रेंज 120mm व्हीकल-माउंटेड मोर्टार सिस्टम का सफल प्रदर्शन     |   शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की मीटिंग पहुंचे सिर्फ तीन सांसद     |   केरल में कोच्चि सहित 10 से ज्यादा जगहों पर ED की छापेमारी     |   उन्नाव: डबल इंजन सरकार जैसा विकास करने की क्षमता सपा-कांग्रेस में नहीं- सीएम योगी     |  

एनसीईआरटी पुस्तक में मोहनजोदड़ो ‘डांसिंग गर्ल’ की ढकी हुई तस्वीर प्रकाशित, खड़े हुए सवाल

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) 'डांसिंग गर्ल' के नाम से प्रसिद्ध मोहनजोदड़ो की कांस्य प्रतिमा के निर्वस्त्र धड़ को एनसीईआरटी की नौवीं कक्षा की नयी पाठ्यपुस्तक में ढका हुआ दिखाया गया है, जिसके बाद इसपर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह तस्वीर एनसीईआरटी की नौवीं कक्षा की कला शिक्षा की नयी पुस्तक “मधुरिमा” के पहले अध्याय “कला का इतिहास” में प्रकाशित की गई है।

पुस्तक में प्रकाशित इस चित्र में प्रतिमा का ऊपरी हिस्सा मूल प्रतिमा की तस्वीरों की तुलना में बदला हुआ दिखाई दिया है। प्रतिमा के ऊपरी हिस्से पर छायांकन किया गया है, जिससे उसके शरीर के वे हिस्से साफ दिखाई नहीं दे रहे जो मूल मूर्ति में नजर आ रहे हैं।

इसके विपरीत, एनसीईआरटी की कक्षा छह की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में 'डांसिंग गर्ल' की तस्वीर मूल कांस्य प्रतिमा के अधिक करीब दिखाई देती है।

एनसीईआरटी की कक्षा 6 की नयी सामाजिक विज्ञान पुस्तकों की समिति के प्रमुख रहे माइकल डैनिनो ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि डांसिंग गर्ल की प्रतिमा को 'उम्र के अनुसार उपयुक्त नहीं' माना गया।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, 'यह हमारी कक्षा छह की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से जुड़ा मामला है। मुझे जो कारण बताया गया, वह यह था कि डांसिंग गर्ल की तस्वीर उस उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं मानी गई।'

उन्होंने कहा, 'हमारी टीम इससे सहमत नहीं थी। हमने कक्षा छह के शिक्षकों से भी बात की और उन्होंने बताया कि डांसिंग गर्ल की प्रतिमा को लेकर कभी कोई समस्या नहीं रही।'

डैनिनो ने कहा, 'मेरे विचार में नग्नता को अनुपयुक्त मानना विक्टोरियन युग की पुरानी सोच है। फिर भी हम भारतीय शिक्षा को उपनिवेशवादी प्रभावों से मुक्त करने की बात करते हैं।'

कक्षा नौ की नयी कला पुस्तक में इस्तेमाल की गई तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए डैनिनो ने कहा कि उन्होंने पहली प्रतिक्रिया में ही असहमति जताई थी।

उन्होंने कहा, 'यदि डांसिंग गर्ल को उसके वास्तविक रूप और सही अनुपात में भारतीय कला पर आधारित अध्याय में भी नहीं दिखाया जा सकता, तो यह एक गंभीर समस्या है।'

डैनिनो ने कहा कि इस बदलाव से 'मूल कलाकृति की गलत प्रस्तुति' होती है।

उन्होंने कहा, 'इस बदलाव के जरिये मूल कलाकृति को उसी तरह गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जैसे मध्य युग में चर्च द्वारा डेविड की प्रतिमा पर अंजीर का पत्ता जोड़कर उस सुंदर कलाकृति को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया था।'

प्रतिमा के महत्व पर डैनिनो ने कहा कि पुरातत्वविदों ने इसके बारे में अलग-अलग व्याख्याएं दी हैं और इसके वास्तविक संदर्भ के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह की कमर पर हाथ रखकर खड़े होने वाली मुद्रा राजस्थान के हड़प्पा स्थल भिरड़ाना से मिले कम-से-कम दो मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों पर भी मिली थी। इससे संकेत मिलता है कि इस मुद्रा का कोई विशेष सांस्कृतिक महत्व था, संभवतः कलात्मक महत्व।

उन्होंने ऐतिहासिक कलाकृतियों की तस्वीरों में बदलाव करने की भी आलोचना की।

उन्होंने कहा, 'जब तक यह किसी अधूरी कलाकृति के संभावित पुनर्निर्माण को दिखाने के लिए स्पष्ट रूप से न किया गया हो, तब तक ऐसी तस्वीर में बदलाव करना एक नकली कलाकृति बनाने जैसा है। यह दर्शाता है कि ऐतिहासिक कलाकृतियों को किस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए, इसको लेकर बेहद कम समझ है।'

अध्याय में डांसिंग गर्ल को मोहनजोदड़ो से प्राप्त लगभग 2600 ईसा पूर्व की कांस्य प्रतिमा बताया गया है।

पुस्तक में कहा गया है कि मोहनजोदड़ो की इस कांस्य प्रतिमा को 'लॉस्ट-वैक्स तकनीक' से बनाया गया था, जो पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में प्रचलित है।

मोहनजोदड़ो से प्राप्त डांसिंग गर्ल सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पुरातात्विक वस्तुओं में से एक मानी जाती है।

एनसीईआरटी ने अब तक दोनों पुस्तकों में प्रतिमा को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किए जाने पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।

भाषा जोहेब रंजन

रंजन