हेलसिंकी, 12 जून (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि यूरोप ऐसे हथियार बेचता है जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाता है, जबकि नयी दिल्ली ने कभी उस महाद्वीप को खतरे में डालने वाला कोई काम नहीं किया है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख की यूरोप द्वारा की गई आलोचना पर उन्होंने फिनलैंड में एक संवाद सत्र के दौरान यह कड़ी टिप्पणी की।
फिनलैंड में बृहस्पतिवार को ‘कुलतारंता टॉक्स’ के दौरान जयशंकर ने यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस से कच्चा तेल खरीदने के भारत के फैसले को सही ठहराया और इस बात को खारिज कर दिया कि नयी दिल्ली ने इस संघर्ष पर ‘‘नैतिक रूप से अस्पष्ट’’ रुख अपनाया है।
मंत्री ने यह भी कहा कि 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए अमेरिका ने भारत से ‘‘खास तौर पर’’ रूसी तेल खरीदने के लिए कहा था।
जयशंकर ने कहा, ‘‘किसी भी यूरोपीय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं किया गया है। काश मैं भारत के मामले में यूरोपीय हथियारों के बारे में भी यही कह पाता। इसलिए इस बात को ध्यान में रखें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यूरोपीय देश ऐसे हथियार बेचते हैं जिनका इस्तेमाल भारत पर हमले के लिए किया जाता है। ऐसा अभी नहीं, बल्कि कई वर्षों से हो रहा है।’’
विदेश मंत्री का यह बयान पाकिस्तान को कई यूरोपीय देशों द्वारा लंबे समय से हथियार और सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति के संदर्भ में था।
जयशंकर ने कहा, ‘‘हम भारतीयों ने कभी यूरोप को खतरे में डालने वाला कोई काम नहीं किया है।’’
रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों का बचाव करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने 2022 से पहले रूस से बड़ी मात्रा में तेल नहीं खरीदा था और यूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद ही उसने रूसी बाज़ार का रुख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तो उस समय बाजार में ज्यादातर तेल रूस का ही उपलब्ध था, क्योंकि यूरोपीय देश मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से तेल खरीद रहे थे, जो हमारी पारंपरिक आपूर्ति थी। इसलिए हालात ने हमें एक खास दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर किया।’’
भाषा आशीष रंजन
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