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सोयाबीन डीओसी की आपूर्ति में कमी से पशुपालन और मुर्गीपालन क्षेत्र पर दबाव: सीएलएफएमए

मुंबई, 12 जून (भाषा) पशु आहार और पशुधन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएलएफएमए) ने शुक्रवार को पशु आहार में प्रोटीन का मुख्य स्रोत माने जाने वाले सोयाबीन तेल रहित खल (डी-आयल्ड केक या डीओसी) की कमी पर चिंता जताई।

संघ का कहना है कि आपूर्ति में कमी के कारण चारे की लागत बढ़ रही है और मुर्गीपालन (पोल्ट्री), जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) और पशुपालन क्षेत्र पर दबाव पड़ रहा है।

सीएलएफएमए ने एक बयान में कहा कि हाल के हफ्तों में सोयाबीन डीओसी की कीमतें 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर लगभग 65-66 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं। इससे चारे के उत्पादन की लागत बढ़ गई है और ‘एनिमल प्रोटीन’ मूल्य श्रृंखला से जुड़े किसानों पर असर पड़ रहा है।

संघ की चेयरपर्सन, दिव्या कुमार गुलाटी ने कहा, ‘‘भारत के पोल्ट्री, एक्वाकल्चर और पशुपालन क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका और निर्यात में अहम योगदान देते हैं। सोयाबीन तेल-रहित खल की लगातार कमी और चारे की बढ़ती लागत से पूरी मूल्य श्रृंखला में खेती की उत्पादकता और मुनाफे पर बुरा असर पड़ सकता है।’’

उन्होंने कहा कि चूंकि भारत वैश्विक समुद्री खाद्यसामग्री निर्यात का ‘पावरहाउस’ बनने की ओर बढ़ रहा है, इसलिए अच्छी गुणवत्ता और किफायती चारे की सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।

गुलाटी ने कहा, ‘‘हम सभी अंशधारकों से अपील करते हैं कि वे एक संतुलित और टिकाऊ समाधान के लिए मिलकर काम करें, जिससे किसानों के हितों की रक्षा हो और देश का चारा और पशु कृषि परिवेश मजबूत हो।’’

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण