कोलकाता, 12 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी संकट के बीच वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी की आलोचनाओं का सामना कर रहे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को सुलह का रुख अपनाया।
अभिषेक ने श्रीरामपुर के सांसद को अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए कहा कि कल्याण ने उन्हें आगे बढ़ाया है और इसलिए पार्टी सांसदों को उनकी आलोचना करने का पूरा अधिकार है।
कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक की नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए जाने, उन पर घमंड का आरोप लगाने और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अपने भतीजे तथा उनके जैसे वरिष्ठ नेताओं में से किसी एक को चुनने का अल्टीमेटम दिए जाने के 24 घंटे से भी कम समय में सुलह की यह पहल सामने आई।
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से निकलते हुए अभिषेक ने पत्रकारों से कहा, ‘‘कल्याण बनर्जी ने मुझे बड़ा होते देखा है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें मुझसे कुछ कड़े शब्द कहने का पूरा अधिकार है। इस पर बेवजह विवाद खड़ा करने की कोई वजह नहीं है।’’
राजनीतिक जानकारों ने इस प्रतिक्रिया को विधानसभा और संसद में पार्टी के बंटवारे के बीच अभिषेक की ओर से परिपक्वता दिखाने की एक सोची-समझी कोशिश के तौर पर देखा।
इससे पहले दिन में, अभिषेक, राज्यसभा में पार्टी के नेता डेरेक ओ'ब्रायन, मदन मित्रा, शोभनदेव चट्टोपाध्याय और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष समेत टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई एक बैठक में हिस्सा लिया।
कल्याण बनर्जी की अनुपस्थिति साफ तौर पर देखी जा सकती थी।
उनकी अनुपस्थिति से राजनीतिक हलकों में तुरंत अटकलें शुरू हो गईं, क्योंकि यह घटना अभिषेक पर उनके अभूतपूर्व हमले और उनसे जुड़े सभी कानूनी मामलों से खुद को अलग करने की उनकी घोषणा के ठीक एक दिन बाद हुई।
भाषा नेत्रपाल माधव
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