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स्मार्ट वाहन प्रौद्योगिकी के लिए स्पेक्ट्रम बैंड अब लाइसेंस से मुक्त

नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) दूरसंचार विभाग ने 5.9 गीगाहर्ट्ज और 77-81 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड वाले स्पेक्ट्रम को लाइसेंस की अनिवार्यता से मुक्त कर दिया है। इस कदम से वाहनों में यात्री सुरक्षा बढ़ने और स्वचालित वाहनों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

विभाग की तरफ से 11 जून को जारी अधिसूचना के मुताबिक, 5875-5905 मेगाहर्ट्ज (5.9 गीगाहर्ट्ज) बैंड में वाहन में लगे वायरलेस उपकरण को रेडियो फ्रीक्वेंसी आवंटन के बगैर ही उपयोग की अनुमति दी गई है। ये उपकरण ‘सेल्युलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग’ तकनीक के जरिए वाहनों को ट्रैफिक सिग्नल, सड़क अवसंरचना और आपात सेवाओं से जोड़ते हैं।

सरकार ने इसे ‘नॉन-इंटरफेरेंस, नॉन-प्रोटेक्शन और नॉन-एक्सक्लूसिव’ आधार पर अनुमति दी है। इसका मतलब है कि ये सेवाएं अन्य लाइसेंसधारी नेटवर्क में बाधा नहीं डालेंगी और उन्हें प्राथमिकता आधारित संरक्षण भी नहीं मिलेगा।

अधिसूचना में कहा गया है कि ऐसे वायरलेस उपकरण रखने, बेचने या किराये पर देने के लिए किसी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।

इसी तरह 77-81 गीगाहर्ट्ज बैंड को भी कम दूरी वाली वाहन रडार प्रणाली के लिए लाइसेंस से मुक्त किया गया है। ये रडार ‘एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम’ (एडास) का हिस्सा होते हैं, जिनके जरिए आपातकाली ब्रेकिंग, लेन से हटने की चेतावनी और एडैप्टिव क्रूज कंट्रोल जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

उद्योग विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन एवं डेटा सेंटर कंपनी सबमर इंडिया के प्रमुख अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि 5.9 गीगाहर्ट्ज बैंड को ‘लाइसेंस-मुक्त’ करने से वाहन, ट्रैफिक सिग्नल और आपात सेवाएं वास्तविक समय में संवाद कर सकेंगी, जिससे दुर्घटनाएं और जाम कम होंगे

आईटीयू-एपीटी फाउंडेशन ऑफ इंडिया (आईएएफआई) के अध्यक्ष भरत भाटिया ने इसे दूरदर्शी नीति बताते हुए कहा कि ये दूरदर्शी कदम इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तेज विस्तार में मदद करेंगे, सड़क सुरक्षा को मजबूत करेंगे और कनेक्टेड एवं स्वचालित वाहनों को बढ़ावा देंगे।

दूरसंचार नियामक ट्राई के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्य एन गुप्ता ने कहा कि निचले छह गीगाहर्ट्ज बैंड में 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को मुक्त करने से इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सुरक्षा, दक्षता और यात्री अनुभव में सुधार होगा।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण