हैदराबाद, 12 जून (भाषा) हैदराबाद की अदालत ने एक महिला द्वारा दायर उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें कथित छेड़छाड़ और धमकी देने के मामले में कांग्रेस की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को प्रतिवादी बनाया गया था। अदालत ने याचिकाकर्ता को मामले के लिए संबंधित सक्षम न्यायालय का रुख करने की सलाह दी।
माना जाता है कि इस मामले में ए. श्रीलता की शिकायत के कारण ही मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन रद्द हुआ।
नटराजन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि याचिका में विधायक और विधान परिषद सदस्य समेत जनप्रतिनिधियों को भी प्रतिवादी बनाया गया है। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी और मामले में सक्षम न्यायालय का रुख करने का निर्देश दिया।
अपनी याचिका में श्रीलता ने कांग्रेस नेता कुंभम शिव कुमार रेड्डी पर ‘‘छेड़छाड़ करने और जान से मारने की धमकी देने’’ का आरोप लगाया। मामले में प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।
इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी महेश कुमार गौड़ के साथ नटराजन को भी प्रतिवादी बनाया गया।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नटराजन की उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें मध्यप्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए उनका नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी। हालांकि, न्यायालय ने उन्हें चुनाव याचिका के माध्यम से इस मामले को उठाने की छूट प्रदान कर दी।
राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा के एक आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अधूरा हलफनामा जमा किया था, जिसमें उनके नामांकन पत्र के साथ जमा किए गए फॉर्म 26 में अदालत में दर्ज एक शिकायत का जिक्र नहीं था।
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले का जिक्र नहीं किया था।
भाषा आशीष दिलीप
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