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अहमदाबाद विमान हादसे की पहली बरसी : मेघानीनगर में अब भी जिंदा हैं दर्दनाक यादें

अहमदाबाद, 12 जून (भाषा) गुजरात के अहमदाबाद में मेघानीनगर के लोग उस भीषण विस्फोट को आज भी स्पष्ट रूप से याद करते हैं, जिसने 12 जून 2025 की दोपहर इस पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था।

एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद बी. जे. मेडिकल कॉलेज के छात्रावास ब्लॉकों से टकरा गया था। इसके बाद भीषण आग लग गई और आसमान में धुएं के घने गुबार उठ गए थे।

इस हादसे के एक साल बाद भी क्षतिग्रस्त छात्रावास परिसर, जिसकी दीवारें आग से काली पड़ चुकी हैं, अब ध्वस्तीकरण की प्रतीक्षा में है। गुजरात सरकार ने इसी स्थान पर नए छात्रावास के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत की है।

कभी युवा चिकित्सकों का निवास रहे खाली पड़े ये भवन उस त्रासदी की तीखी याद दिलाते हैं जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में विमान में सवार 241 यात्री और चालक दल तथा जमीन पर 19 लोग शामिल थे।

हादसे के मृतकों के परिजनों और जीवित बचे लोगों के लिए जीवन अब तक सामान्य नहीं हो सका है।

इन्हीं में से एक सीताबेन पटनी हैं, जो दुर्घटनास्थल के सामने चाय की दुकान चलाती थीं।

पटनी ने बताया कि हादसे के दिन उनका 15 वर्षीय बेटा आकाश उन्हें लंचबॉक्स देने दुकान पर आया था और फिर वहीं जमीन पर लेट गया था। कुछ ही मिनटों बाद विमान गिरा और वह आग की चपेट में आ गया।

सीताबेन ने कहा, ‘‘मैं अपने बेटे को बचाने दौड़ी, लेकिन आग पहले ही वहां पहुंच चुकी थी। मैं आग की लपटों के बीच से नहीं जा सकी।’’

उन्होंने बताया कि आग की चपेट में आने से उनके दोनों हाथ भी गंभीर रूप से झुलस गए।

सीताबेन ने रोते हुए कहा, ‘‘मैं सड़क की ओर भागी और चिल्लाती रही कि मेरा बेटा वहीं सो रहा है, उसे बचा लो।’’

छात्रावास के अंदर उस समय छात्र दोपहर का भोजन कर रहे थे, आराम कर रहे थे या कक्षाओं की तैयारी में लगे थे।

विमान दुर्घटना के बाद भीषण आग लग गई और छात्रावास मेस में रखे एलपीजी सिलेंडर फट गए, जिससे आग और भड़क गई।

कई छात्र इमारत के अंदर फंस गए। कुछ ने खिड़कियों से कूदकर जान बचाई, जबकि कई धुएं से भरे गलियारों से भागकर बाहर निकले।

जमीन पर मारे गए 19 लोगों में चार एमबीबीएस छात्र थे जो छात्रावास में रह रहे थे।

एक छात्र ने बताया, ‘‘धूल बैठने के बाद हम अंदर गए और घायल छात्रों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद दमकल और पुलिस ने बचाव अभियान संभाला।’’

स्थानीय लोग भी मदद के लिए मौके पर पहुंच गए थे। आग और धमाकों के खतरे के बावजूद कई लोग छात्रावास के अंदर घुसे और घायलों को एम्बुलेंस व निजी वाहनों तक पहुंचाया।

इस हादसे में एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया, जिसने वैश्विक स्तर पर सुर्खियां बटोरीं।

विश्वास कुमार रमेश आपातकालीन निकास के पास बैठे थे और दुर्घटना के समय वह मलबे के बीच से जीवित बच निकलने में सफल रहे, जबकि उनके साथ यात्रा कर रहा उनका भाई नहीं बच सका।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अगले दिन अहमदाबाद का दौरा किया और घायलों से मुलाकात की, जिनमें रमेश भी शामिल थे।

हादसे की पहली बरसी पर शुक्रवार को बी. जे. मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने सिविल अस्पताल परिसर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की।

छात्रों, चिकित्सकों और मृतकों के परिजनों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बाद में 260 मृतकों की स्मृति में 260 पौधे लगाए गए।

छात्रावास की काली पड़ चुकी इमारत वीरान पड़ी थी। भले ही यहां नया छात्रावास बन सकता है, लेकिन 12 जून 2025 की यादें उन सभी के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी जिन्होंने इस देश की सबसे भयावह विमान दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खोया या इस त्रासदी से बच निकले।

भाषा रवि कांत रवि कांत माधव

माधव