दीमापुर, 12 जून (भाषा) सात नगा संगठनों के एक समूह ने अपने समुदाय के मुद्दों के राजनीतिक समाधान को अंतिम रूप दिए जाने से पहले केंद्र, असम और नगालैंड के बीच अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र में ऊर्जा संसाधनों की खोज से जुड़े समझौते का विरोध किया है।
नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप (एनएनपीजी) ने एक बयान में कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर स्वामित्व और नियंत्रण का मुद्दा वर्ष 2017 में केंद्र के साथ हस्ताक्षरित ‘एग्रीड पोजीशन’ का हिस्सा है।
समूह ने 2017 के समझौते के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि औपचारिक राजनीतिक समझौता होने से पहले नगा क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की खोज का कोई भी प्रयास ‘‘अवैध और सहमत सिद्धांतों के विरुद्ध’’ होगा।
ऊर्जा संसाधनों की खोज और दोहन को लेकर केंद्र तथा असम और नगालैंड सरकारों के बीच बृहस्पतिवार को एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
एनएनपीजी की कार्यकारी समिति ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि राजनीतिक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने तक कोई भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय कंपनी नगा क्षेत्र की भूमि से कच्चे तेल का दोहन न कर सके।
समूह ने राजनीतिक समाधान से पहले तेल दोहन को नगा लोगों के अधिकारों और हितों के साथ ‘‘विश्वासघात’’ करार दिया।
इसने नगालैंड और असम के बीच किसी भी राजस्व-साझेदारी व्यवस्था का भी विरोध किया और दावा किया कि विवादित क्षेत्र ऐतिहासिक और कानूनी रूप से नगा मातृभूमि का अभिन्न हिस्सा है।
सात नगा राजनीतिक समूहों से मिलकर बनी एनएनपीजी की कार्यकारी समिति केंद्र के साथ अंतिम नगा राजनीतिक समाधान को लेकर वार्ता कर रही है। समिति ने 17 नवंबर 2017 को केंद्र के साथ ‘एग्रीड पोजीशन’ पर हस्ताक्षर किए थे।
वहीं, केंद्र वर्ष 1997 में युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से एनएससीएन-आईएम के साथ भी समाधान के लिए बातचीत कर रहा है और वर्ष 2015 में उसके साथ एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
अक्टूबर 2019 में नगा शांति वार्ता के लिए केंद्र के तत्कालीन वार्ताकार ने घोषणा की थी कि बातचीत पूरी हो चुकी है।
हालांकि, केंद्र ने अब तक नगाओं के लिए अलग झंडे और अलग संविधान की एनएससीएन-आईएम की लगातार उठाई जा रही मांग को स्वीकार नहीं किया है।
भाषा
राखी रंजन
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