नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) प्रख्यात फिल्मकार इम्तियाज अली का मानना है कि भारत-विभाजन की त्रासदी का सामना करने वाले लोगों को आगे बढ़ने की ताकत उनके दिलों में बसे प्रेम और उससे जुड़ी यादों ने दी और उनकी नयी फिल्म ‘‘मैं वापस आऊंगा’’ इसी भावनात्मक अनुभव को केंद्र में रखकर बनाई गई है।
अली ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि यह फिल्म विभाजन की उथल-पुथल के बीच बिछड़े प्रेम और पास रह गई स्मृतियों की कहानी है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह हजारों-लाखों लोगों की कहानी है। जब वे अपनी इच्छा न होने के बाद भी सीमा पार करके आए, तब वे अपने साथ गठरियां, संदूक, गहने और धन लेकर आए। वे अपने दिलों में प्रेम भी लेकर आए थे।’’
अली ने कहा कि समय के साथ यही प्रेम यादों में बदल गया और लोगों के लिए एक ऐसे निजी खजाने की तरह बन गया, जहां वे कठिन और निराशाजनक क्षणों में लौट सकते थे।
‘‘मैं वापस आऊंगा’’ में अभिनेता दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, वेदांग रैना और शरवरी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म में 95 वर्षीय एक व्यक्ति अपने अतीत को याद करता है और उसके जीवन की अनकही प्रेम कहानी सामने आती है।
अली ने कहा कि विभाजन पर अनेक फिल्में बन चुकी हैं, लेकिन उनकी कोशिश यह समझने की रही कि इतने गहरे दुख और विस्थापन के बावजूद लोग अपने भीतर प्रेम और सुंदर स्मृतियों को कैसे बचाए रख पाए।
उन्होंने कहा, ‘‘हम केवल अनुमान लगा सकते हैं कि उन्होंने कितना कष्ट सहा होगा। हिंसा और उथल-पुथल की बात की जा सकती है, लेकिन उनकी निराशा की गहराई को समझना कठिन है। सैकड़ों विभाजन पीड़ितों से बातचीत के बाद मुझे महसूस हुआ कि उन्हें उनके दिलों में मौजूद प्रेम ने संभाले रखा।’’
अली ने बताया कि फिल्म की प्रेरणा उन्हें पंजाब में अपनी 2024 की फिल्म ‘‘अमर सिंह चमकीला’’ की शूटिंग के दौरान मिली, जब उन्होंने विभाजन के प्रत्यक्षदर्शी रहे अनेक लोगों से मुलाकात की।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने पाया कि वे नफरत की नहीं, बल्कि अच्छी और खूबसूरत यादों की बात करते थे। कोई अपने बगीचे के पेड़ों को याद करता था, कोई उस लड़की को जिसे वह चुपके से देखने जाता था, तो कोई नदी किनारे दोस्तों के साथ बिताए समय को याद करता था।’’
अली के अनुसार, विभाजन की सबसे बड़ी अनदेखी क्षति सांस्कृतिक और सौंदर्यबोध से जुड़ी थी। उन्होंने कहा, ‘‘अपने शोध के दौरान मुझे लगा कि विभाजन के कारण रंग, कला, भाषा और सांस्कृतिक विरासत का भी नुकसान हुआ। इस सौंदर्यात्मक क्षति पर बहुत कम चर्चा होती है।’’
‘‘मैं वापस आऊंगा’’ की कहानी एक सिख युवक और मुस्लिम युवती के प्रेम के इर्द-गिर्द घूमती है। अली का कहना है कि उनके शोध से यह भी सामने आया कि उस दौर का शिक्षित शहरी समाज अपेक्षाकृत अधिक उदार और आधुनिक विचारों वाला था।
उन्होंने कहा कि फिल्म में दो अलग-अलग समय काल में एक ही चरित्र को दिखाना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि 78 वर्षों का अंतर किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व और स्मृतियों को पूरी तरह बदल सकता है।
अली ने बताया कि शरवरी को फिल्म में लेने का एक कारण यह भी था कि उनका व्यक्तित्व 1940 और 1950 के दशक की अभिनेत्रियों, विशेषकर गीता बाली, की याद दिलाता है।
‘‘मैं वापस आऊंगा’’ में संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है। फिल्म का निर्माण बिरला स्टूडियोज और अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट ने विंडो सीट फिल्म्स के सहयोग से किया है।
भाषा मनीषा संतोष
संतोष