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एआई-171 हादसा: एक साल बाद भी परिवार जांच के नतीजों का कर रहे इंतजार

नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) एअर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के गुजरात के अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना को एक साल बीत चुका है लेकिन पीड़ितों के परिवार अब भी अपने इन सवालों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं कि विमान हादसे का कारण क्या था और जांच किस नतीजे पर पहुंची ?

लंदन जा रही एआई-171 उड़ान पिछले साल 12 जून की दोपहर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 241 यात्री और चालक दल के सदस्य तथा जमीन पर मौजूद 19 लोग शामिल थे। विमान में सवार केवल एक यात्री जीवित बचा था।

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी हादसे में मारे गए लोगों में शामिल थे। विमान अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डे से उड़ान भरने के 32 सेकंड बाद बी. जे. मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर पर गिरा था।

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) अब तक अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं कर पाया है, जबकि जांचकर्ताओं से अपेक्षा की गई थी कि वे इसे दुर्घटना के एक साल पूरा होने के आसपास रिपोर्ट को तैयार कर लेंगे।

सूत्रों ने बताया कि जांच में देरी हो रही है क्योंकि अधिकारी विमान के जीई एयरोस्पेस इंजन और उससे जुड़े नियंत्रण प्रणालियों से संबंधित महत्वपूर्ण सबूतों की जांच जारी रखे हुए हैं। जांचकर्ताओं से एक अंतरिम रिपोर्ट जारी करने की उम्मीद है, जबकि अंतिम रिपोर्ट अगले तीन महीनों के भीतर आने की संभावना है।

पिछले वर्ष जारी की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया था कि विमान के उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही दोनों इंजन ईंधन नियंत्रण स्विच लगभग एक साथ “रन” से “कटऑफ” यानी चालू से बंद की स्थिति में चले गए, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया।

भारतीय अधिकारियों ने हालांकि बार-बार कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

इस सप्ताह ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स’ ने एक बार फिर न्यायिक जांच की मांग दोहराई और किसी भी अंतरिम रिपोर्ट को जारी करने का विरोध किया।

पिछले एक वर्ष में, एअर इंडिया और विमानन कंपनी का स्वामित्व रखने वाले टाटा समूह की कंपनियों ने मुआवजे, परिवारों की सहायता और जीवित बचे व्यक्ति तथा पीड़ितों के परिजनों को समर्थन देने पर ध्यान केंद्रित किया है।

एअर इंडिया ने कहा कि उसने 96 प्रतिशत प्रभावित परिवारों को 25-25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया है, जबकि टाटा संस ने ‘एआई171 मेमोरियल एंड वेलफेयर ट्रस्ट’ के माध्यम से 90 प्रतिशत से अधिक पात्र परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता प्रदान की है।

यह दुर्घटना हाल के वर्षों की सबसे भीषण विमानन दुर्घटनाओं में से एक है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं की भागीदारी रही है। इनमें अमेरिका के विशेषज्ञ भी शामिल हैं। अधिकारी विमान प्रणालियों, इंजन नियंत्रणों और कॉकपिट डेटा की गहन जांच कर रहे हैं।

हालांकि, इस हादसे के एक साल बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाये हैं। यह पता नहीं चल पाया है कि क्या इस दुर्घटना की वजह मानवीय गलती थी, कोई तकनीकी खराबी थी या फिर कोई और कारण था।

भाषा देवेंद्र मनीषा

मनीषा