नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस की छात्र शाखा की एक जनहित याचिका पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल को दोबारा खोलने का निर्देश देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन की अवकाश पीठ ने कहा कि यदि किसी छात्र को आपत्ति है तो वह व्यक्तिगत रूप से उचित कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
पीठ ने साथ ही कहा कि पोर्टल दो से सात जून तक खुला रहा और अगर उसे दोबारा खाला गया तो परिणाम घोषित करने की पूरी प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
पीठ ने कहा, ‘‘आपके लिए यह एक सप्ताह है, लेकिन पूरी प्रक्रिया में एक महीने की देरी हो जाती है... आप समझ नहीं रहे हैं। यह केवल एक कदम नहीं है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘ मैं (पीठ) कोई और निर्देश नहीं दूंगा। जो भी व्यक्ति प्रभावित है, वह व्यक्तिगत रूप से अदालत का रुख कर सकता है।’’
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की ओर से पेश वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि पोर्टल को कुछ और दिनों के लिए फिर से खोला जाए।
वहीं, अधिकारियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रभावित छात्रों ने पहले ही अपनी आपत्तियां दर्ज करा दी हैं और विवादित उत्तर पुस्तिकाओं पर विचार किया जा रहा है।
मेहता ने कहा कि यह जनहित याचिका ‘बहुत सामान्य धारणाओं’ पर आधारित है और यदि एनएसयूआई का अनुरोध स्वीकार कर लिया जाता है, तो 17 लाख से अधिक स्नातक छात्रों के दाखिले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के अनुरोध पर पोर्टल की समय-सीमा नहीं बढ़ाई जा सकती क्योंकि यह छात्रों के हित में नहीं होगा। उन्होंने अदालत को बताया कि पहले ही समय-सीमा एक दिन के लिए बढ़ाई गई थी और पोर्टल छह जून के बजाय सात जून को बंद किया गया था।
मेहता ने यह भी कहा कि सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन मंच से पहले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने छात्रों को उनकी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त करने के लिए 19 मई से 25 मई तक एक पोर्टल खोला था जिसके तहत लगभग 4 लाख छात्रों ने 11 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं की मांग की थी।
एनएसयूआई के वकील के अनुरोध पर अदालत ने मामले की सुनवाई जुलाई में ‘रोस्टर बेंच’ के समक्ष निर्धारित की।
भाषा शोभना नरेश
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