नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा)तृणमूल कांग्रेस सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कहा कि मुश्किल समय में वह पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह अपने राजनीतिक करियर में एक कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी थीं।
पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि कुछ लोग मजबूरी, डर या प्रलोभन के कारण बनर्जी का साथ छोड़ सकते हैं, लेकिन उनका सैद्धांतिक रुख यह है कि वह न तो पार्टी और न ही नेता को छोड़ेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर रहा हूं- मैं तृणमूल कांग्रेस और ममता जी के साथ था, मैं तृणमूल कांग्रेस और ममता जी के साथ हूं तथा मैं तृणमूल कांग्रेस और ममता जी के साथ ही रहूंगा। मेरा कहीं और जाने का कोई इरादा नहीं है।’’
तीन लाइन का व्हिप आमतौर पर राजनीतिक दलों द्वारा संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतदान से पहले जारी किया जाता है।
सिन्हा का यह बयान ऑनलाइन प्रसारित हो रही तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की कथित सूची में उनका नाम आने के बाद आया है।
केंद्रीय मंत्री रह चुके सिन्हा पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ थे और वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने से पहले सिन्हा कांग्रेस में भी थे।
सिन्हा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर बृहस्पतिवार को बधाई दी।
सिन्हा ने पोस्ट में कहा, ‘‘समाज और देश के हमारे मित्र और मार्गदर्शक, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके कार्यकाल के 12 साल पूरे होने पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। यह शायद अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल है। आपके लंबे, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की कामना करता हूं। जय हिंद!’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं ममता बनर्जी का साथ उनके कठिन समय में नहीं छोड़ूंगा.... जब मैं 2019 में (लोकसभा) चुनाव (पटना से) हार गया था, तो बहुत कम लोग मेरे साथ खड़े थे और ममता बनर्जी उन लोगों में से एक थीं, जो मेरे साथ खड़े थे।’’
सिन्हा ने 2019 का चुनाव बिहार के पटना साहिब निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, जबकि उनकी पत्नी पूनम सिन्हा ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ से समाजवादी पार्टी (सपा) की उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।
उन्होंने कहा कि हालांकि सभी राजनीतिक दलों में उनके दोस्त हैं, लेकिन वह बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से मेरे बारे में कई तरह की अटकलें हैं। कुछ लोग सच बोल रहे हैं, जबकि कुछ अफवाहें फैला रहे हैं। कुछ लोगों ने दावा किया है कि मैं तथाकथित बागी समूह में शामिल हो गया हूं।’’
सिन्हा ने कहा कि वह ‘‘स्वभाव से विद्रोही हैं’’। उन्होंने कहा कि वह ‘‘हमेशा सच बोलते हैं’’ और अपनी बात को बेबाकी के साथ रखते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैं अपनी बात स्पष्ट कर रहा हूं.... ममता जी मेरे कठिन समय में मेरे साथ थीं, इसलिए मैं उनके कठिन समय में उनका साथ नहीं छोड़ सकता।’’
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी जीत का श्रेय तृणमूल कांग्रेस, ममता और आसनसोल की जनता को दिया और स्पष्ट किया कि उन्हें बागी खेमे में शामिल होने का आमंत्रण मिलने के बावजूद वह इसमें शामिल नहीं हुए।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा रूख बहुत स्पष्ट है-जब ममता जी मेरे कठिन समय में मेरे साथ खड़ी थीं, तो अब यह मेरा कर्तव्य है कि मैं इस समय उनके साथ खड़ा रहूं।’’
सिन्हा ने कहा कि बनर्जी एक जुझारू नेता हैं। उन्होंने हाल में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पास अब भी पश्चिम बंगाल में मत हिस्सेदारी 41 प्रतिशत है।
सिन्हा ने कहा, ‘‘मैं उन लोगों का आभारी हूं जिन्होंने मुझे तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन मेरा सैद्धांतिक रुख यह है कि मुझे इस समय ममता बनर्जी के साथ खड़ा रहना चाहिए। मैं अपना रास्ता नहीं बदलूंगा।’’
विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के विधायक दल में फूट के साथ-साथ उसके ज्यादातर सांसदों ने भी बागी तेवर अपना लिये हैं।
भाषा देवेंद्र रंजन
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