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अदालत ने अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी आदेश पर रोक लगाई

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें राजनीतिक टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने कहा कि समाचार पोर्टल ‘न्यूजलॉन्ड्री’ की महिला पत्रकारों के संबंध में कथित अपमानजनक टिप्पणियां ‘‘शायरी’’ के रूप में की गई थीं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरषोत्तम पाठक ने मित्रा द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की और 22 अप्रैल के मजिस्ट्रेट आदेश पर रोक लगाने के अनुरोध संबंधी उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया।

अदालत ने नौ जून के आदेश में कहा, ‘‘कथित अपमानजनक शब्द शायरी के रूप में हैं, लेकिन इनमें किसी व्यक्ति का स्पष्ट रूप से नाम नहीं लिया गया है। इस्तेमाल किए गए शब्दों और वाक्यों का बारीकी से मतलब तभी समझा जा सकता है, जब पुनरीक्षण याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएं।’’

इस पुनरीक्षण याचिका में मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें मालवीय नगर पुलिस थाने के प्रभारी (एसएचओ) को पत्रकार मनीषा पांडे एवं अन्य लोगों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

मजिस्ट्रेट ने कहा था कि उस अकाउंट की पुष्टि के लिए पुलिस जांच आवश्यक है, जिससे कथित रूप से ट्वीट किए गए थे।

न्यायाधीश ने कहा कि यदि पुनरीक्षण याचिका के अंतिम निपटारे तक मजिस्ट्रेट के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी जाये, तो शिकायतकर्ताओं को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा।

सत्र न्यायालय ने मित्रा की इस दलील पर भी गौर किया कि ‘‘उनके पक्ष को सुने बिना प्राथमिकी दर्ज करने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं है’’।

सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ताओं के वकील ने रोक लगाये जाने के अनुरोध संबंधी अर्जी का विरोध किया और दलील दी कि मित्रा की पोस्ट में महिला पत्रकारों को निशाना बनाते हुए ‘‘अपमानजनक, निंदात्मक शायरी और स्पष्ट रूप से यौन-संबंधी टिप्पणियां’’ थीं, जो उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के समान है।

भाषा

देवेंद्र प्रशांत

प्रशांत