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मानकों का पालन न करने पर 15 से अधिक एसटीपी संचालकों पर दो करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने दिल्ली जल बोर्ड द्वारा चलाए जा रहे कई संयंत्रों समेत 15 से ज़्यादा जलमल शोधन संयंत्रों (एसटीपी) के संचालकों पर, अपशिष्ट प्रवाह के मानकों को पूरा न करने के लिए 2.89 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

यह जानकारी डीपीसीसी की ओर से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल एक हलफ़नामे से सामने आई।

यह कार्रवाई एनजीटी के एक मामले के सिलसिले में की गई, जिसमें जलमल शोधन संयंत्रों के कामकाज और यमुना नदी पर उनके असर को लेकर चिंता जताई गई थी।

डीपीसीसी ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि वह हर महीने डीजेबी के सभी चालू एसटीपी की निगरानी करता है और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई के लिए पत्र जारी करता है।

जुलाई और अक्टूबर 2025 के बीच तय मानकों को पूरा न कर पाने वाले 14 एसटीपी के ऑपरेटरों को दिसंबर 2025 में पर्यावरण मुआवज़े के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

अगस्त 2025 में दर्ज उल्लंघनों के लिए सेन नर्सिंग होम एसटीपी के ऑपरेटर को भी एक अलग नोटिस जारी किया गया था।

प्रदूषण नियंत्रण संस्था ने कहा कि 13 अप्रैल, 2026 को 2,89,60,000 रुपये के पर्यावरण मुआवज़े की पुष्टि करने वाले निर्देश जारी किए गए थे।

ओखला फेज-पांच, मोलरबंद, वसंत कुंज (पुराना और नया), महरौली, यमुना विहार, सोनिया विहार, कापसहेड़ा, निलोठी, दिल्ली गेट नाला, कोंडली, घिटोरनी और सेन नर्सिंग होम नाला जैसे कई एसटीपी पर मुआवज़ा लगाया गया है।

हलफ़नामे के अनुसार, यमुना विहार फ़ेज़-एक और फ़ेज़-तीन के एसटीपी पर सबसे ज़्यादा, यानी 29-29 लाख रुपये का मुआवज़ा लगाया गया।

भाषा तान्या मनीषा

मनीषा