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न्यायाधीशों की टिप्पणियों को लेकर सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती: केंद्रीय विधि मंत्री मेघवाल

भुवनेश्वर, नौ जून (भाषा) केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मंगलवार को कहा कि विभिन्न अदालतों में मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों द्वारा की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

मेघवाल ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में यह बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संविधान में तीन स्तंभ हैं- कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। संविधान के अनुच्छेद 50 के अनुसार, ये तीनों अंग स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और न्यायपालिका की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र का मूल विषय है। हमारा संविधान सरकार को न्यायपालिका को कोई निर्देश देने की अनुमति नहीं देता।’’

केंद्रीय विधि मंत्री ने कहा, ‘‘जब न्यायाधीश दलीलें सुनते हैं, तो वे कुछ टिप्पणियां करते हैं, जिन्हें कानूनी भाषा में ‘रनिंग कमेंट्री’ (सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणियां) कहा जाता है। यह ‘रनिंग कमेंट्री’ किस सीमा तक की जाएगी, यह न्यायपालिका देखेगी।’’

मेघवाल ने कहा कि इन टिप्पणियों को इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा राजनीतिक मुद्दा बना दिया जाता है।

केंद्रीय मंत्री ने एक हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिवक्ताओं के बीच फर्जी डिग्री धारकों के संदर्भ में की गई अपनी टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण दिया था।

प्रधान न्यायाधीश ने वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने संबंधी याचिका को लेकर एक वकील को फटकार लगाते हुए ‘‘परजीवी’’ और ‘‘कॉकरोच’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था जिससे विवाद पैदा हो गया था।

मेघवाल ने कहा, ‘‘हमें प्रधान न्यायाधीश के स्पष्टीकरण से संतुष्ट होना चाहिए।’’

भाषा

सिम्मी संतोष

संतोष