जयपुर, नौ जून (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मंगलवार को मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने की कड़ी आलोचना की।
दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कदम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लाभ पहुंचाने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गहलोत ने कहा कि भाजपा स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से चुनाव लड़ने में सक्षम नहीं है और लोकतंत्र को कमजोर करने वाले हथकंडों का सहारा ले रही है।
उन्होंने दावा किया कि नटराजन का नामांकन खारिज करने के लिए बताए गए आधार वैध नहीं थे और इसे कांग्रेस को एक राज्यसभा सीट से वंचित करने की साजिश बताया।
गहलोत ने कहा, ‘‘यह घटना उस तरह की ‘वोट चोरी’ को दर्शाती है, जिसका उल्लेख कांग्रेस नेता राहुल गांधी बार-बार करते रहे हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकसभा और राज्यसभा सहित विभिन्न विधायी निकायों में अपनी संख्यात्मक ताकत बढ़ाने के लिए प्रक्रियात्मक उपायों का दुरुपयोग कर रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ किसी भी प्रकार की साजिश का विरोध करने का आह्वान करते हुए कहा कि कोई भी दल यह सुनिश्चित नहीं कर सकता कि भविष्य में उसके साथ ऐसा नहीं होगा।
वहीं, टीकाराम जूली ने नामांकन खारिज किए जाने को लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर आघात बताया।
जूली ने कहा कि नामांकन रद्द करने के लिए बताए गए तकनीकी आधार चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं और यह भाजपा को अतिरिक्त राज्यसभा सीट दिलाने की सोची-समझी कोशिश प्रतीत होती है।
जूली ने कहा कि निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा करना तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी ऐसी कार्रवाई, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न करे, चिंता का विषय है।’’
शक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जूली ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
भाषा
बाकोलिया रवि कांत