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पश्चिम एशिया संकट: उर्वरक मंत्रालय का 2026-27 के लिए सब्सिडी को दोगुना करने का आग्रह

नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) उर्वरक मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी को 1.71 लाख करोड़ रुपये से दोगुना करने की मांग की है, क्योंकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आयातित उर्वरक की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी।

पिछले महीने, उर्वरक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि अगर पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुई रुकावटें लंबी खिंचती हैं, तो चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी खर्च तीन लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, उर्वरक विभाग ने उर्वरक सब्सिडी में 100 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग को लेकर वित्त मंत्रालय से संपर्क किया है।

मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी का बजट अनुमान लगभग 1.71 लाख करोड़ रुपये है।

हालांकि, सूत्रों ने कहा कि घरेलू स्तर पर उर्वरक का उत्पादन बढ़ाए जाने से स्थिति में कुछ नरमी आ सकती है।

सरकार यूरिया और पी एंड के (फॉस्फेटिक और पोटासिक) उर्वरक पर भारी सब्सिडी देती है। फिलहाल, नीम-लेपित यूरिया का एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) 242 रुपये प्रति बैग (45 किलो) है और डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) 1,350 रुपये प्रति बैग (50 किलो) के भाव पर बिक रहा है।

सूत्रों ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उर्वरक के कुल आयात खर्च पर असर पड़ेगा। वैश्विक निविदा प्रक्रिया भी जटिल होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक कीमतें बढ़ रही हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कुल उपलब्धता भी कम हो रही है।

सूत्रों ने दो बड़ी चुनौतियों की ओर इशारा किया - पहली चुनौती आपूर्ति सुनिश्चित करना और निविदा प्रक्रिया है, जबकि दूसरी चुनौती उर्वरक की कीमतों में बदलाव की दर और गति है।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि खरीफ की मौजूदा बुवाई के मौसम के लिए उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है।

सोमवार को केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने कहा, ‘‘खरीफ 2026 के लिए कृषि विभाग ने उर्वरक की जरूरत का दोबारा आकलन किया है, जो 383.9 लाख टन है और इसके मुकाबले आज की तारीख में स्टॉक 197.56 लाख टन है।’’

उन्होंने कहा कि यह स्टॉक खरीफ़ सत्र की मांग का 51 प्रतिशत से अधिक है और यह सामान्य स्तर 33 प्रतिशत से काफी ज्यादा है।

वर्ष 2025 में, देश की कुल उर्वरक जरूरत का लगभग 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया।

भारत स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में यूरिया और डीएपी का आयात करता है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय