(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, आठ जून (भाषा) अमेरिका के ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीजा पर लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को रद्द करने के मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत के फैसले का अमेरिका में भारतीय प्रवासी हितों की पैरवी करने वाले संगठनों ने स्वागत किया है और इसे रोजगार-आधारित आव्रजन प्रणाली के लिए एक न्यायसंगत कदम बताया है।
सोमवार को एक संघीय न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि एच-1बी आवेदनों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाया गया 100,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क अवैध है, क्योंकि इसे कांग्रेस की मंजूरी प्राप्त नहीं थी।
एच-1बी वीजा एक अस्थायी प्रवास वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को उन विशिष्ट व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है जिनमें सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। प्रौद्योगिकी कंपनियां प्रत्येक वर्ष भारत और चीन जैसे देशों से हजारों कर्मचारियों की भर्ती के लिए इस वीजा पर निर्भर रहती हैं।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) में नीति एवं रणनीति प्रमुख खंडेराव कंड ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “हम मैसाचुसेट्स की संघीय अदालत के उस निर्णय का स्वागत करते हैं, जिसने एच-1बी वीजा शुल्क के रूप में लगाए गए एक लाख अमेरिकी डॉलर के शुल्क को निरस्त कर दिया है। इससे रोजगार-आधारित आव्रजन प्रणाली में निश्चितता और निष्पक्षता बहाल होगी।”
इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “अदालत के आदेश के बाद एच-1बी वीजा से जुड़े सभी हितधारकों को राहत मिलेगी, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह वास्तव में इस मुद्दे का अंत है।”
कंड ने कहा कि अदालत का फैसला अमेरिका की नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए उपयुक्त है।
उन्होंने कहा, “अत्यधिक कुशल वैश्विक प्रतिभाओं तक पहुंच अमेरिका के प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों की निरंतर वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि बड़े नीतिगत बदलाव वैधानिक अधिकार और आर्थिक वास्तविकताओं पर आधारित होने चाहिए।”
कंड ने कहा कि एफआईआईडीएस का मानना है कि संतुलित और योग्यता-आधारित आव्रजन ढांचा अमेरिकी कारोबारों और व्यापक अर्थव्यवस्था, दोनों को मजबूत बनाता है।
हालांकि, जोशीपुरा ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन अभी भी एच-1बी वीजा धारकों के लिए प्रक्रियात्मक स्तर पर बाधाएं पैदा कर सकता है, जो कानून का उल्लंघन न करती हों।
उन्होंने कहा, “यदि कार्यपालिका एच-1बी वीजा धारकों के लिए बाधाएं उत्पन्न करना चाहती है, जैसा कि प्रशासन की घोषित नीतिगत प्राथमिकताओं से संकेत मिलता है, तो वह ऐसे प्रक्रियात्मक उपाय अपना सकती है जो अमेरिकी कानून के विरुद्ध न हों।”
उन्होंने प्रशासन और न्यायपालिका के बीच हाल के टकराव का भी उल्लेख किया।
पिछले वर्ष सितंबर में ट्रंप ने एक उद्घोषणा पर हस्ताक्षर करके नए एच-1बी वीजा आवेदनों पर एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगा दिया था।
भारतीय एच-1बी वीजा के मुख्य लाभार्थी हैं, जो दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को अमेरिका में लाने का माध्यम है।
भारत से आए उच्च कुशल पेशेवरों को एच-1बी वीजा की अत्यधिक बड़ी संख्या मिलती है, जो कांग्रेस द्वारा निर्धारित प्रति वर्ष 65,000 की सीमा के अंतर्गत है तथा इसके अतिरिक्त 20,000 वीजा अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों के लिए होते हैं।
भाषा अमित रंजन
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