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विधानपरिषद उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर राजद नेता शिवचंद्र राम ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया

पटना, आठ जून (भाषा) बिहार विधानपरिषद चुनाव के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। विधानपरिषद का टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व विधायक एवं पार्टी के अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचंद्र राम ने सोमवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी।

यहां प्रेसवार्ता में इस्तीफे की घोषणा करते समय दलित नेता शिवचंद्र राम भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।

राम ने कहा,‘‘एक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में मैं हमेशा अपने नेता के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम करता रहा। लेकिन मेरे साथ अन्याय हुआ है। पिछले तीन दिनों से मेरे समाज के लोग पटना के विभिन्न होटलों में एकत्रित हैं। उन्हें मुझे टिकट नहीं मिलने से गहरा आघात पहुंचा है। मुझे अपने समाज का सम्मान और उसका नेतृत्व करना है। इसलिए आज मैं राजद के एससी/एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद सहित पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देता हूं।’’

राजापाकर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके और राज्य सरकार में मंत्री का दायित्व संभाल चुके राम लंबे समय से विधानपरिषद भेजे जाने की उम्मीद लगाए हुए थे। हालांकि, पिछले दो विधानसभा चुनावों में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली जाने के कारण वह सक्रिय राजनीति में हाशिये पर रहे हैं।

इस बीच, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य की हालिया टिप्पणी ने भी पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष को और उजागर कर दिया है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में राजद की हार के बाद यादव परिवार के भीतर मतभेदों की चर्चा लगातार होती रही है।

विधानसभा चुनाव में पराजय और परिवार के भीतर मतभेदों की खबरों के बाद रोहिणी आचार्य ने राजनीति से दूरी बनाने एवं अपने परिजनों से संबंध समाप्त करने की घोषणा की थी।

अपने पिता को किडनी दान करने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आईं रोहिणी आचार्य ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गयी थीं।

पिछले विधानसभा चुनाव में राजद की बिहार विधानसभा में 75 से घटकर 24 सीट पर सिमट गई थी। पार्टी में उभरते असंतोष और टिकट वितरण को लेकर बढ़ते विवाद ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच राजद नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

भाषा कैलाश

राजकुमार

राजकुमार