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किरायेदार के पर्यावरण नियम उल्लंघनों के लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं : एनजीटी का आदेश बरकरार

(पांचवें पैराग्राफ में अतिरिक्त सामग्री के साथ)

नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें कहा गया था कि किरायेदार की रासायनिक इकाई से कथित तौर पर हुए पर्यावरण नियमों के उल्लंघनों के लिए मकान मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने अधिकरण के 14 नवंबर 2025 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

उच्चतम न्यायालय गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एनजीटी के आदेश को चुनौती दी गई थी। एनजीटी ने सूरत के एक मकान मालिक को उसके किरायेदार की रासायनिक इकाई द्वारा कथित तौर पर किए गए पर्यावरण नियमों के उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाले जीपीसीबी के आदेश को रद्द कर दिया था।

एनजीटी ने फैसला सुनाया था कि मालिक जगमोहन लचीराम जालान को उनके किराए के परिसर में संचालित औद्योगिक इकाई द्वारा किए गए अपराधों के लिए 25 लाख रुपये का अंतरिम पर्यावरणीय क्षति मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

यह मामला जीपीसीबी द्वारा 16 अक्टूबर, 2021 को इकाई को बंद करने का निर्देश दिए जाने के बाद शुरू किया गया था, जो एक ऐसी कंपनी के खिलाफ था जो ‘डाई-इंटरमीडिएट’ विनिर्माण कार्य में संलग्न थी और जिसने अनिवार्य सहमति की आवश्यक शर्तों का पालन नहीं किया था।

निरीक्षण टीम ने पाया कि उस इकाई के अपशिष्ट जल के नमूने निर्धारित अनुमेय सीमा से अधिक थे, जिसके कारण प्रदूषण बोर्ड ने 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

जालान ने तर्क दिया था कि उन्होंने 2020 में एक समझौते के तहत एक निजी कंपनी के निदेशक को वह परिसर किराए पर दिया था और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि वह एक बिना लाइसेंस वाली इकाई है।

उन्होंने बाद में किरायेदार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उनके अभ्यावेदन पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।

जीपीसीबी ने 2024 में जुर्माने को बरकरार रखा था।

भाषा शोभना वैभव

वैभव

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