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भारत-ब्रिटेन एफटीए सह-निर्माण को देता है वाणिज्यिक प्रोत्साहनः प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत

लंदन, पांच जून (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों देशों के लिए एक 'ऐतिहासिक क्षण' है, जो मध्यस्थता और सुलह के क्षेत्र में सह-निर्माण को वाणिज्यिक प्रोत्साहन देता है।

प्रधान न्यायाधीश ने भारतीय मध्यस्थता परिषद (आईसीए) की तरफ से यहां 'भारत-ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में वैकल्पिक विवाद समाधान' विषय पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि सभी पक्षों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना और विवादों के मूल्य तथा उनकी तात्कालिकता के अनुरूप प्रक्रियाएं अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे दोनों अर्थव्यवस्थाएं गहरे वाणिज्यिक संबंधों की ओर बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे विवाद निपटान प्रणाली में विश्वास होना भी उतना ही जरूरी है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “पिछले साल भारत एवं ब्रिटेन के बीच एफटीए संपन्न हुआ, जो दोनों देशों के लिए निस्संदेह एक ऐतिहासिक क्षण था। जिस समय अंतरराष्ट्रीय व्यापार संवाद तनाव और अनिश्चितताओं से भरा हुआ है, उस समय भारत और ब्रिटेन ने दुनिया को आगे बढ़ने का एक बेहतर रास्ता दिखाया।”

उन्होंने कहा, “हम भारत और ब्रिटेन के संबंधों के एक बहुत महत्वपूर्ण दौर में मिल रहे हैं। हमारी दोनों प्रणालियां समान विधि परंपरा पर आधारित हैं और इनके बीच लंबे समय से एक कानूनी संवाद रहा है। साथ ही, दोनों अर्थव्यवस्थाएं अपनी गहरी वाणिज्यिक साझेदारी को और अधिक सार्थक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।”

उन्होंने कहा, “इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए यह आवश्यक है कि जब भी मतभेद उत्पन्न हों, उनका समाधान निष्पक्ष, कुशल और व्यापारिक वास्तविकताओं के सम्मान के साथ किया जाए।”

उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में लागू होने जा रहे भारत-ब्रिटेन एफटीए ने दोनों उन्नत समान विधि परंपरा वाली न्याय-व्यवस्थाओं के बीच विकास को एक साथ जोड़ने और आगे बढ़ाने के लिए मजबूत व्यापारिक प्रोत्साहन पैदा किया है।

उन्होंने कहा, “अब जरूरत तुलना करने की नहीं, बल्कि मिलकर निर्माण करने की है। दोनों देश मिलकर एक ऐसा वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) ढांचा तैयार करें, जिसमें दोनों प्रणालियां एक-दूसरे की विश्वसनीयता, विशेषज्ञता और मानकों को साझा करें और मजबूत करें। इस तरह ऐसी प्रणाली तैयार हो जो कोई भी देश अकेले नहीं बना सकता।”

उन्होंने आधुनिक मध्यस्थता व्यवस्था की तुलना भारत की प्राचीन पंचायत प्रणाली से की, जिसमें विवादों के समाधान के लिए सामुदायिक विश्वास और अनुभव पर आधारित निर्णय लिए जाते थे।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम