बेंगलुरु, पांच जून (भाषा) कर्नाटक के गदग से कांग्रेस विधायक एच के पाटिल ने शुक्रवार को मंत्री रामलिंगा रेड्डी से विभागों के आवंटन को लेकर दिए गए अपने इस्तीफे पर पुनर्विचार करने तथा पार्टी नेतृत्व से इस मुद्दे का निष्पक्ष समाधान निकालने की अपील की।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा पूर्व कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री पाटिल ने रेड्डी के इस्तीफे को पार्टी के लिए ‘‘बड़ा चेतावनी संकेत’’ बताया।
पाटिल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैं अपने मित्र श्री रामलिंगा रेड्डी से कांग्रेस के व्यापक हित में अपने रुख पर पुनर्विचार करने का एक बार फिर अनुरोध करता हूं। उनका इस्तीफा एक बड़ा चेतावनी संकेत है। मैं संबंधित नेताओं से आग्रह करता हूं कि वे इस मुद्दे के निष्पक्ष समाधान पर गंभीरता से ध्यान दें।’’
रेड्डी ने कहा है कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उन्हें बड़े और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का विभाग सौंपा गया।
यह इस्तीफा मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार द्वारा बृहस्पतिवार रात विभागों के आवंटन के बाद सामने आया।
बेंगलुरु से आठ बार के विधायक रेड्डी ने कहा कि अपने पांच दशक लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी मंत्री पद के लिए लॉबिंग नहीं की और न ही पार्टी नेतृत्व से किसी विशेष विभाग की मांग की।
यह पूछे जाने पर कि यदि पार्टी नेतृत्व उन्हें मनाने का प्रयास करे या उनकी पसंद का विभाग दे तो क्या वह अपना फैसला बदलेंगे, रेड्डी ने स्पष्ट रूप से ‘‘नहीं’’ में जवाब दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस पार्टी में बना रहूंगा। मैं कांग्रेस विधायक के रूप में अपना काम जारी रखूंगा। इस बारे में मेरे मन में कोई दूसरा विचार नहीं है।’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि घटनाक्रम से निराश होने के बावजूद उन्हें किसी भी नेता से व्यक्तिगत शिकायत नहीं है।
रेड्डी ने कहा, ‘‘मुझे सिद्धरमैया से कोई नाराजगी नहीं है। मुझे शिवकुमार से कोई नाराजगी नहीं है। मुझे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से कोई नाराजगी नहीं है। मुझे पार्टी आलाकमान से कोई नाराजगी नहीं है।’’
इस बीच, कर्नाटक के मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने भी नयी सरकार में विभागों के आवंटन पर सार्वजनिक रूप से असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठता का समुचित ध्यान नहीं रखा गया है । उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से इस प्रक्रिया की समीक्षा करने की अपील की।
भाषा रवि कांत रवि कांत राजकुमार
राजकुमार