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महाराष्ट्र एफडीए ने कार्रवाई के दौरान 2.17 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरण जब्त किये

ठाणे/पालघर, पांच जून (भाषा) महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने मुंबई, भिवंडी, ठाणे और पालघर में अनियमितताओं को लेकर चलाए गए अभियान के तहत 2.17 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के चिकित्सा उपकरण और दवाइयां जब्त की हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 और चिकित्सा उपकरण नियम 2017 के तहत यह व्यापक प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया।

अधिकारी ने बताया कि इसके परिणामस्वरूप अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को आपूर्ति के लिए गैर-कीटाणुरहित दस्तानों को कीटाणुरहित बताकर बेचने वाले एक रैकेट का भी पर्दाफाश हुआ।

उन्होंने कहा, ‘‘एक विशेष टीम ने भिवंडी में एक चिकित्सा उपकरण निर्माण संयंत्र का निरीक्षण किया, जहां गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और प्लांट मास्टर फाइल की अनुपस्थिति समेत विनिर्माण प्रोटोकॉल के गंभीर उल्लंघन पाए गए। वहां से 9.88 लाख रुपये मूल्य के सर्जिकल दस्तानों का स्टॉक जब्त कर लिया गया है और कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।’’

उन्होंने बताया कि एफडीए ने मुंबई के साकी नाका में ‘साची मेडिक’ पर भी छापा मारा, जो बिना पंजीकरण के चल रहा था । उन्होंने बताया कि ‘साची मेडिक’ ने अवैध रूप से मलेशिया से लाखों सर्जिकल दस्ताने आयात किए थे और बिना लाइसेंस के उसका भंडारण कर रखा था।

उन्होंने कहा, ‘‘ये गैर-कीटाणुरहित दस्ताने भिवंडी और वाडा (पालघर) की इकाइयों को पैकेजिंग, लेबलिंग और बाद में अनधिकृत बिक्री के लिए भेजे जा रहे थे। एफडीए की टीम ने 74.85 लाख रुपये मूल्य के सर्जिकल दस्ताने जब्त किए। रिकॉर्ड से पता चलता है कि इनकी आपूर्ति पहले ही मुंबई के नगर निगम अस्पतालों को की जा चुकी थी।’’

एफडीए ने एक विज्ञप्ति में कहा कि पालघर के वाडा में ‘मेडीअर्थ लाइफकेयर प्राइवेट लिमिटेड’ पर छापेमारी में पता चला कि कंपनी ने गैर-कीटाणुरहित दस्ताने खरीदे तथा उन्हें बिना किसी प्रसंस्करण के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को कीटाणुरहित बताकर आपूर्ति की।

एफडीए ने वाडा के संयंत्र में 1.26 करोड़ रुपये मूल्य के गैर-कीटाणुरहित बैंडेज क्लॉथ, रोल किए हुए बैंडेज आदि के स्टॉक को जब्त कर लिया, जिन पर 'महाराष्ट्र सरकार (एमएमजीपीए) आपूर्ति - बिक्री के लिए नहीं' अंकित था।

इसके अतिरिक्त, सरकारी आपूर्ति प्रमाणपत्र वाले 6.17 लाख रुपये मूल्य की एलोपैथिक दवाएं जब्त की गईं, क्योंकि केंद्र के पास वैध थोक दवा लाइसेंस नहीं था।

भाषा राजकुमार पवनेश

पवनेश