तिरुवनंतपुरम, पांच जून (भाषा) केरल के वन विभाग ने राज्य में मानव-पशु संघर्ष को कम करने के लिए 100 दिवसीय कार्ययोजना तैयार की है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने पहाड़ी क्षेत्रों में विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
केरल के वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने यहां वन अधिकारियों के साथ बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक भागीदारी के साथ एक केंद्रीकृत सौर ऊर्जा संचालित बाड़ (सोलर फेंसिंग) निगरानी प्रणाली और एक स्वचालित खराबी-पहचान प्रणाली स्थापित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के माध्यम से जनता को वन सीमाओं पर लगी सोलर फेंसिंग में आने वाली खराबी की रिपोर्ट करने की नियंत्रित अनुमति दी जाएगी।
राज्य के वन मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 2,000 किलोमीटर सीमावर्ती क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग की जा चुकी है और अगले 100 दिनों के भीतर अतिरिक्त 100 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।
सरकार की योजना अगले पांच वर्षों में सोलर फेंसिंग का दायरा 1,900 किलोमीटर और बढ़ाने की है।
जॉन ने कहा, 'एक और महत्वपूर्ण कदम 'विस्टा क्लियरेंस' (रास्ता साफ करना) है। इसके तहत सोलर फेंसिंग से 20 मीटर के दायरे में आने वाले पेड़ों और घनी झाड़ियों को काटा जाएगा, ताकि हाथी पेड़ों को बाड़ पर गिराकर आबादी वाले क्षेत्रों में न घुस सकें।'
उन्होंने बताया कि स्थानीय स्वशासन विभागों की मदद से वन सड़कों के किनारे की झाड़ियों और जंगली वनस्पतियों को भी साफ किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि अगले 100 दिनों के भीतर 100 किलोमीटर क्षेत्र में 'विस्टा क्लियरेंस' का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही त्वरित कार्य बल (आरआरटी) की संख्या में भी बढ़ोतरी की जाएगी।
उन्होंने कहा, 'वर्तमान में हमारे पास 28 त्वरित कार्य बल हैं, जो 6,000 किलोमीटर की वन सीमाओं की निगरानी के लिए नाकाफी हैं। हम वन कार्यालयों के अधीन 25 अतिरिक्त त्वरित कार्य बल गठित करने की योजना बना रहे हैं, जो वहीं से संचालित होंगे।'
भाषा सुमित रंजन
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