भुवनेश्वर, पांच जून (भाषा) ओडिशा सरकार ने थाईलैंड में फंसे होने का दावा करने वाले राज्य के पांच प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
केंद्रपाड़ा जिले के विभिन्न इलाकों के रहने वाले ये अकुशल श्रमिक पर्यटक वीजा पर दक्षिण-पूर्व एशियाई देश थाईलैंड गए थे लेकिन वहां एक प्लाईवुड निर्माण कंपनी में काम कर रहे थे। श्रमिकों ने सोशल मीडिया मंच पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में यह दावा किया।
श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां रोका जा रहा है, वेतन नहीं दिया जा रहा है तथा नियोक्ता द्वारा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से उन्हें बचाकर स्वदेश वापस लाने की गुहार लगाई है।
एक श्रमिक ने वीडियो संदेश में आरोप लगाया, ‘‘मैं पिछले दो साल और तीन महीने से थाईलैंड में हूं। लेकिन नियोक्ता न तो वेतन दे रहा है और न ही हमें ओडिशा लौटने की अनुमति दे रहा है। हमें पर्याप्त भोजन भी नहीं मिल रहा है।’’
ओडिशा सरकार के एक अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र के रहने वाले एक अन्य श्रमिक राज कुमार पासी को भी कथित रूप से इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘घटना की जानकारी मिलते ही हमने केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन को जमीनी स्तर पर जांच करने का निर्देश दिया था। हमें जिले से जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है।’’
अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने थाईलैंड से इन श्रमिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने नयी दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर को इस संबंध में सूचित कर दिया है। वे आगे की कार्रवाई के लिए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय करेंगे।’’
अधिकारी के अनुसार, फंसे हुए श्रमिकों की पहचान बनोज कुमार मलिक (34), नलिनी दास (53), नित्यानंद मलिक (40), कैलाश चंद्र सेठी (42) और उमाकांत बारिक (33) के रूप में हुई है।
रेजिडेंट कमिश्नर नयी दिल्ली में किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार का अधिकृत प्रतिनिधि होता है।
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