(तीसरे पैरा में सुधार के साथ)
नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को प्रतिबंधित संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के कई शीर्ष नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया, और कहा कि मामले में भारत सरकार को उखाड़ फेंकने तथा 2047 तक इस्लामी खलीफा का शासन स्थापित करने की साजिश का ‘‘गंभीर संदेह’’ है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत 25 पीएफआई सदस्यों के साथ-साथ संगठन के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यदि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को समग्र रूप से देखा जाए, तो यह गंभीर संदेह पैदा करती है कि आरोपियों ने ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के माध्यम से और उनकी ओर से काम करते हुए, एक बड़ी साजिश को आगे बढ़ाने के लिए सहमति जताई और उस पर अमल किया-वह साजिश थी देश के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से वर्ष 2047 तक या उससे पहले भारत की धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकना और भारत में शरिया कानून के तहत एक इस्लामी खलीफा स्थापित करना।’’
उन्होंने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रत्येक आरोपी की भूमिका साजिश के एक या अधिक पहलुओं से मेल खाती है।
अदालत ने पीएफआई के खिलाफ आरोप तय करने का भी आदेश दिया, और औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है।
सितंबर 2022 में, केंद्र ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत पीएफआई और इसके कई सहयोगी संगठनों पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था, तथा कहा था कि उनका आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी संगठनों के साथ ‘‘संबंध’’ है।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
दिलीप
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