नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को दावा किया कि मोदी सरकार रणनीतिक महत्व के आधार पर ‘‘पारिस्थितिकी रूप से विनाशकारी’’ ग्रेट निकोबार परियोजना को उचित ठहराने कर प्रयास कर रही है, जबकि यह एक वाणिज्यिक परियोजना है जिसे एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रह चुके रमेश ने लोगों से इस परियोजना के खिलाफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई एक याचिका पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया।
रमेश ने एक्स पर कहा, ‘‘पारिस्थितिकी रूप से विनाशकारी ग्रेट निकोबार परियोजना को अब रणनीतिक महत्व के आधार पर उचित ठहराया जा रहा है। लेकिन यह नुकसान की भरपाई करने की एक तरकीब है, जो मोदी सरकार द्वारा अपनाई जा रही है।’’
रमेश का कहना है कि 8 अगस्त, 2024 को वित्त मंत्रालय की इकाई सार्वजनिक निवेश बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला था कि परियोजना में 'रणनीतिक उद्देश्यों का अभाव' है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘फिर भी, 18 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना को एक रणनीतिक परियोजना के रूप में अधिसूचित किया। ऐसा प्रतीत होता है कि जो तर्क दिया गया है वह किसी गहरे रणनीतिक विचार के बजाय मुख्य रूप से परियोजना का स्थान है।’’
रमेश ने के अनुसार, 3 जनवरी 2025 को यह निर्णय लिया गया कि परियोजना में न्यूनतम 55 प्रतिशत हिस्सेदारी एक भारतीय स्वामित्व वाली और नियंत्रित इकाई के पास होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ''इसके अलावा, 2 अप्रैल 2025 को, इस परियोजना को ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (वीजीएफ) के साथ एक संयुक्त उद्यम मॉडल पर प्रस्तावित किया गया था। इससे प्रधानमंत्री के सबसे करीबी औद्योगिक मित्र के लिए इस परियोजना को संभालने और पांच सितारा होटल और कैसीनो बनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।’’
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