तिरुवनंतपुरम, पांच जून (भाषा) केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने शुक्रवार को राज्य में 308 जनजातीय शिक्षकों को हटाने के संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के कथित फैसले की आलोचना की।
उन्होंने इस कदम को एक 'गंभीर अन्याय' बताया, जिससे जनजातीय छात्रों की शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
विजयन ने फेसबुक पर एक पोस्ट में सरकार से इन शिक्षकों को उनके पदों पर बहाल करने के लिए कदम उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि दूरदराज के इलाकों में जनजातीय बच्चों को सहायता प्रदान करने और स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के लिए पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार द्वारा इन शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी।
उनके अनुसार, ये शिक्षक गोत्रबंधु योजना के तहत वायनाड, पलक्कड़ और मलप्पुरम जिलों में कार्यरत थे और पहली से चौथी कक्षा तक के छात्रों को पढ़ाने के साथ जनजातीय समुदायों में शिक्षण सहायता प्रदान कर रहे थे।
विजयन ने कहा, 'अनुसूचित जनजाति समुदायों से आने वाले शिक्षकों को बर्खास्त करने का निर्णय एक गंभीर अन्याय है।'
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा जारी शैक्षणिक वर्ष के लिए उनकी नियुक्तियों को बरकरार न रखने के फैसले के बाद वायनाड में 241, पलक्कड़ में 50 और मलप्पुरम में 17 शिक्षकों ने अपनी नौकरी खो दी है।
उन्होंने कहा, 'इस योजना ने न केवल जनजातीय छात्रों की शैक्षणिक प्रगति सुनिश्चित की, बल्कि रोजगार प्रदान करके जनजातीय परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार करने में भी मदद की।'
विजयन ने कहा कि बर्खास्त शिक्षकों ने अपनी बहाली की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, 'सरकार को उनकी मांग की वैधता को पहचानना चाहिए और उन्हें उनके पदों पर बहाल करने के लिए कदम उठाने चाहिए।'
भाषा प्रचेता मनीषा
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