कोलकाता, पांच जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के महापौर पद से इस्तीफा दे दिया।
हकीम ने कहा कि वह समुचित ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने यह फैसला किया।
उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की सहमति मिलने के बाद उन्होंने 'गर्व से अपना सिर ऊंचा रखकर' पद से इस्तीफा दिया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, राज्य के पूर्व मंत्री एवं पार्टी के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक हकीम ने अपना इस्तीफा सौंप दिया।
अपने इस्तीफे से पहले आयोजित संवाददाता सम्मेलन में, हकीम ने नगर निकाय के प्रमुख के रूप में अपने लगभग साढ़े सात साल के कार्यकाल पर संतोष व्यक्त किया और केएमसी अधिकारियों तथा कोलकाता के लोगों को शहर को उसके कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से बाहर निकालने में मदद करने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे कार्यकाल के दौरान कोलकाता को चक्रवात ‘अम्फान’ और कोविड-19 महामारी समेत कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। केएमसी अधिकारियों और शहर के नागरिकों के सहयोग से हमने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया।’’
हकीम ने कहा कि पद छोड़ने का फैसला करने से पहले उन्होंने बनर्जी से अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं गर्व के साथ सिर ऊंचा करके जाना चाहता था। मैंने अपनी नेता से अनुमति मांगी और उन्होंने मुझे अनुमति दे दी।’’
नवंबर 2018 में महापौर के रूप में अपनी नियुक्ति को याद करते हुए, हकीम ने कहा कि उन्हें शुरू में संदेह था कि क्या वह शहर के कुछ सबसे प्रतिष्ठित पूर्व महापौरों की विरासत पर खरा उतर पाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं पहली बार महापौर बना, तो मुझे शहर के लिए बेहतर काम करने का पूरा भरोसा था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस और देशबंधु चित्तरंजन दास जैसे उन दिग्गजों का योग्य उत्तराधिकारी बन पाऊंगा, जो कभी इस पद पर आसीन थे।’’
हकीम ने केएमसी अध्यक्ष माला रॉय के कार्यालय में अपना इस्तीफा सौंप दिया।
विधायक हकीम ने वर्षों से तृणमूल कांग्रेस की सरकारों में कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभाले हैं। हकीम ने स्वतंत्रता के बाद कोलकाता का पहला मुस्लिम महापौर बनकर इतिहास रच दिया था।
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप