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राहुल गांधी ने ग्रेटर निकोबार परियोजना का विरोध किया क्योंकि भारत की रणनीतिक प्रगति पंसद नहीं: भाजपा

नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को ग्रेट निकोबार विकास परियोजना की आलोचना करने के लिए राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता भारत के बढ़ते भूराजनीतिक विस्तार से ‘परेशान’ हैं और वह चाहते हैं कि दूसरे देश भारत से ज्यादा ताकतवर हो जाएं।

यह टिप्पणी शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर राहुल गांधी के बयान के बाद आई। राहुल ने ‘एक्स’ पर 16 मिनट से अधिक अवधि के अपने वीडियो बयान में मोदी सरकार की इस दलील को 'झूठ' बताया कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना रक्षा और एक मालवाहक बंदरगाह से जुड़ी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह वास्तव में एक व्यवसायी को भारत के सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिकीय क्षेत्र में होटल और कैसीनो बनाने में मदद करने का प्रयास है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहीन सिन्हा ने कहा कि ग्रेटर निकोबार परियोजना की परिकल्पना 1970 के दशक की है। उन्होंने कांग्रेस पर दशकों पहले इस तरह की ‘भविष्योन्मुखी’ परियोजनाओं पर विचार होने के बावजूद उन्हें लागू नहीं करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर कांग्रेस ऐसी परियोजना की सिर्फ कल्पना कर सकी, लेकिन उन्हें लागू नहीं कर पाई, तो यह निश्चित रूप से हमारी गलती नहीं है।’’

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इस परियोजना के जरिए, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में भारत की जमीन पर मौजूदगी असल में लगभग 400 किलोमीटर और दक्षिण में, हिंद महासागर में और अंदर तक हो जाएगी। ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी सिरे पर जिस विकास की योजना बनाई गई है, वह मलक्का स्ट्रेट से सिर्फ़ 75 से 80 किलोमीटर दूर होगा, जो आज दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत समुद्री व्यापार को संभालता है।’’

उन्होंने आगे, ‘‘इसलिए आप सोच सकते हैं कि इतने नजदीक बंदरगाह का कितना बड़ा व्यावसायिक और शिपिंग महत्व होगा। आप ग्रेट निकोबार द्वीप के भूरणनीतिक महत्व का भी अंदाजा लगा सकते हैं।’’

आदिवासी समुदायों और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले असर के बारे में गांधी की चिंताओं का जवाब देते हुए, सिन्हा ने कहा कि अभी ग्रेट निकोबार द्वीप का सिर्फ लगभग 10 प्रतिशत जमीन का क्षेत्र इस्तेमाल में है।

उन्होंने कहा कि अगले दो दशकों में अनुमानित 3.5 लाख से 4 लाख लोगों को बसाने का काम पारिस्थितिकीय और पर्यावरण चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग चरण में होगा।

सिन्हा ने कहा कि भारत सिर्फ इसलिए भविष्य की अवसंरचना परियोजनाओं को नहीं छोड़ सकता क्योंकि उनमें आदिवासी इलाके शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर इस तर्क को हर जगह लागू किया जाता है, तो कई बड़ी बुनियादी परियोजनाएं, जिनमें ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और आदिवासी इलाकों से गुजरने वाले कनेक्टिविटी कॉरिडोर शामिल हैं, को रोकना होगा।’’

भाजपा नेता ने परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से मिली मंजूरी का भी हवाला दिया और कहा कि यह स्वीकृति संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरी सावधानी और आवश्यक जांच-पड़ताल के बाद दी गई है।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश