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वेलनेस कोच मितुशी अजमेरा की नई किताब में संतुलित पोषण के व्यावहारिक सुझाव

नयी दिल्ली, पांच जून (भाषा) बाधित नींद, बार-बार खाने की इच्छा, कम ऊर्जा और पाचन संबंधी समस्याएं कमजोरी या इच्छाशक्ति की कमी के संकेत नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का संकेत हैं कि आहार शरीर के अनुकूल नहीं है। यह दावा वेलनेस कोच एवं पोषण विशेषज्ञ मितुशी अजमेरा ने अपनी नई किताब में किया है।

ब्लूम्सबरी इंडिया द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘फियरलेस डाइट: ए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड टू बैलेंस्ड न्यूट्रिशन’ में अजमेरा ने कहा है— “खाने से डरना बंद करें, अपने शरीर को समझना शुरू करें।”

लेखिका का कहना है कि उनकी किताब किसी सख्त डाइट या पूर्णता (परफेक्शन) पर जोर देने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों को ऐसी जानकारी और आत्मविश्वास देना है जिससे वे अपनी पसंद और उपलब्ध खाद्य पदार्थों के माध्यम से अपने शरीर को सही पोषण दे सकें।

उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य लोगों को इतना सक्षम बनाना है कि वे खुद अपने स्वास्थ्य के मार्गदर्शक बन सकें। अजमेरा के अनुसार, इंसान बिना बोले भी अपने शरीर से लगातार संवाद करता है और हर गतिविधि—खान-पान, नींद, व्यायाम, सोच और आत्म-वार्ता—शरीर को संदेश भेजती है।

किताब में कहा गया है कि लंबे समय तक स्वास्थ्य सुधार का मूल केवल इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि आदतों का निर्माण है। प्रत्येक अध्याय एक-एक आदत पर केंद्रित है ताकि पाठक उसे अपने जीवन में स्थायी रूप से अपना सकें, उसके बाद ही अगली आदत पर आगे बढ़ा जा सके।

अजमेरा के अनुसार, जब पोषण संतुलित होता है तो व्यायाम अधिक प्रभावी होता है, जब व्यायाम सही तरीके से किया जाता है तो नींद बेहतर होती है और जब शरीर को पर्याप्त आराम मिलता है तो पोषण और व्यायाम दोनों का असर बेहतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य केवल एक क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने से नहीं, बल्कि इन तीनों पहलुओं के संतुलन से प्राप्त होता है।

भाषा मनीषा नरेश

नरेश