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भारत और चीन के ‘नाजुक’ संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करेगा रूस: पुतिन

( तस्वीरों सहित )

( विजय जोशी )

सेंट पीटर्सबर्ग, पांच जून (भाषा) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और चीन के ‘‘नाजुक’’ द्विपक्षीय संबंधों में रूस हस्तक्षेप नहीं करेगा।

पुतिन ने साथ ही विश्वास जताया कि भारत और चीन काफी समय से लंबित अपने सीमा विवादों को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पुतिन ने ‘पीटीआई’ समेत दुनिया की अग्रणी समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ व्यापक बातचीत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की सराहना करते हुए कहा कि दोनों नेता सीमा संबंधी मामलों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रूस के राष्ट्रपति ने ‘पीटीआई’ के सीईओ और प्रधान संपादक विजय जोशी के एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘भारत और चीन के बीच नाजुक एवं बहुआयामी संबंध है और इसमें हस्तक्षेप करना अच्छा विचार नहीं है। बेशक, हमारा अपने दोनों मित्रों-भारत और चीन-के साथ संवाद होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी, दोनों सीमा मुद्दे समेत आपसी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।’’

भारत और चीन ने 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़पों और उसके बाद चार वर्ष से अधिक समय तक बने रहे सैन्य गतिरोध के कारण अपने संबंधों में आए गंभीर तनाव के बाद, पिछले एक वर्ष से अधिक समय में संबंधों को फिर से सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

राष्ट्रपति पुतिन ने एशिया में रूस के रणनीतिक संतुलन को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत एवं चीन के साथ रूस की दशकों पुरानी साझेदारियां स्वाभाविक रूप से विकसित हुई हैं और दोनों संबंध एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं।

उन्होंने इन संबंधों को स्वाभाविक रूप से विकसित बताया और कहा कि भारत के साथ रूस की बढ़ती निकटता चीन की कीमत पर नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे चीन के साथ रूस का गहरा गठजोड़ भारत के साथ उसके संबंधों को प्रभावित नहीं करता।

पुतिन ने रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय ढांचे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक समय सुझाव दिया था कि भारत और चीन के नेता रूस में मिलें और इसी तरह रूस-भारत-चीन ढांचे की स्थापना हुई। हमारे पास बात करने और सहमति बनाने के लिए कई मुद्दे थे।’’

रूस के राष्ट्रपति ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों की जटिलताओं से अच्छी तरह अवगत हैं।’’

पुतिन ने साथ ही कहा कि वह नहीं मानते कि पाकिस्तान चीन के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे ऐसा नहीं लगता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान एक बड़ा देश है, जिसके विभिन्न देशों के साथ बहुआयामी संबंध हैं।’’

उन्होंने चीन-पाकिस्तान मित्रता के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘बेशक, पाकिस्तान के लिए चीन के साथ सहयोग को ध्यान में रखना बहुत महत्वपूर्ण है।’’

पुतिन ने भारत के साथ रूस के रक्षा और सैन्य संबंधों का भी उल्लेख किया तथा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन का हवाला दिया।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूस ने भारत को पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 लड़ाकू विमान के निर्माण पर संयुक्त रूप से काम करने का प्रस्ताव दिया है।

भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की एक खेप खरीदने की प्रक्रिया में है।

पुतिन ने कहा, ‘‘हमने अपने भारतीय मित्रों को प्रौद्योगिकी.. पांचवीं पीढ़ी की प्रौद्योगिकी पर मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया है... हम भारत को लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने के लिए इस क्षेत्र में उसके साथ काम करने को तैयार हैं।’’

रूस के राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश भारत को प्रमुख रक्षा मंचों और हथियारों के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने को तैयार है।

भाषा

सिम्मी मनीषा

मनीषा