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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकी रद्द की

नैनीताल, चार जून (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अंकिता भंडारी हत्याकांड से संबंधित आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार प्राथमिकी में से दो रद्द कर दी।

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने हालांकि, बाकी दो प्राथमिकी में पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है।

राठौर ने देहरादून और हरिद्वार जिलों में अपने खिलाफ दर्ज चार अलग-अलग प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए उन्हें चुनौती दी थी।

शिकायतकर्ताओं, दुष्यंत गौतम और आरती गौर ने आरोप लगाया कि प्रसारित सामग्री जानबूझकर उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से तैयार की गयी थी।

अपने आदेश में, न्यायालय ने पाया कि बहादराबाद में दर्ज प्राथमिकी और हरिद्वार के झबरेड़ा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए आरोप देहरादून के डालनवाला पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए आरोप एक जैसे हैं।

इसके अलावा, अदालत ने संज्ञान में लिया कि हरिद्वार मामलों में शिकायतकर्ता वास्तविक पीड़ित नहीं थे, और चूंकि कथित पीड़ित पहले ही एक अलग प्राथमिकी दर्ज करा चुके थे, इसलिए ये मामले एक के बाद एक दर्ज की गई प्राथमिकी के समान थे । दोहरे दंड के सिद्धांत का हवाला देते हुए अदालत ने हरिद्वार की दोनों प्राथमिकी रद्द कर दीं ।

हालांकि, पीठ ने आरती गौड़ द्वारा देहरादून के नेहरू कॉलोनी पुलिस थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी और दुष्यंत गौतम द्वारा डालनवाला पुलिस थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया इन दोनों शिकायतों में संज्ञेय अपराध प्रतीत होते हैं जिनकी विस्तृत जांच आवश्यक है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर जघन्य अपराध से जोड़कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना एक गंभीर अपराध है ।

अदालत ने टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति के पास किसी अपराध से संबंधित सबूत हैं, तो उन्हें किसी को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के बजाय सक्षम अधिकारियों को सौंप देना चाहिए।

पीठ ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की बजाए सार्वजनिक मुद्दों को उठाने के लिए किया जाना चाहिए ।

भाषा सं दीप्ति धीरज

धीरज