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ओडिशा: भाई के साथ पढ़ने के लिए छात्र ने छोड़ी आईआईटी बंबई की सीट, मिली थी 32वीं रैंक

भुवनेश्वर, चार जून (भाषा) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास में अपने जुड़वां भाई मसरूर के साथ पढ़ाई करने की खातिर महरूफ ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी बंबई से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (सीएसई) करने का मौका छोड़ कर भाईचारे की एक अनोखी कहानी पेश की है।

दरअसल 'जेईई एडवांस्ड 2026' परीक्षा में महरूफ अहमद खान ने अखिल भारतीय स्तर पर 32वीं रैंक (एआईआर 32) हासिल की थी, जिससे छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय आईआईटी बंबई के सीएसई पाठ्यक्रम में दाखिला पाना उनके लिए बेहद आसान था।

वहीं दूसरी ओर, उनके दो मिनट बड़े जुड़वां भाई मसरूर की रैंक 169 थी, जिसके चलते उन्हें केवल आईआईटी मद्रास में ही सीएसई मिलने की उम्मीद थी। अपने इसी भाई के साथ रहकर आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए महरूफ ने आईआईटी बंबई की सीट को हंसते-हंसते अलविदा कह दिया।

उनके पिता डॉ. मंसूर अहमद खान ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि बेहतर रैंक होने के कारण महरूफ को आईआईटी बंबई में कंप्यूटर साइंस मिलने की पूरी संभावना थी, लेकिन उनके जुड़वां भाई मसरूर को उनकी रैंक के हिसाब से आईआईटी मद्रास में ही यह मौका मिल सकता था। इसलिए महरूफ ने अपने भाई के साथ रहने के लिए आईआईटी बंबई का अवसर छोड़ने का फैसला किया।

डॉ. खान पेशे से चिकित्सक (एमडी) हैं और आईआईटी भुवनेश्वर के एक औषधालय में प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं।

उनकी मां डॉ. जीनत बेगम, जो स्त्री रोग विशेषज्ञ (एमएस) हैं, ओडिशा सरकार के एक अस्पताल में काम करती थीं।

उन्होंने अपने दोनों बेटों की तैयारी के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और तीन साल तक राजस्थान के कोटा में उनके साथ किराए के मकान में रहीं।

डॉ. खान ने बताया कि उनकी पत्नी ने बच्चों के लिए अपने करियर का त्याग किया, जबकि वह खुद भुवनेश्वर में ही रहे।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों भाइयों ने 'जेईई (मेन) 2026' में भी एक समान 285 अंक और 99.99 परसेंटाइल हासिल किए थे।

भाषा सुमित माधव

माधव