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केरल के श्वेत पत्र में बढ़ते घाटे के मद्देनजर घाटे में चल रही सरकारी इकाइयों के निजीकरण का आह्वान

तिरुवनंतपुरम, चार जून (भाषा) मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशान द्वारा बृहस्पतिवार को राज्य विधानसभा में पेश किए गए एक श्वेत पत्र के अनुसार घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम केरल के वित्तीय स्थिति पर एक बड़ा बोझ बन गए हैं और पिछले कुछ वर्षों में उनके कुल घाटे में तेजी से वृद्धि हुई है।

पूर्व कैबिनेट सचिव के. एम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति द्वारा तैयार किए गए श्वेत पत्र में सरकार के स्वामित्व वाले उद्यमों के पुनर्गठन की सिफारिश की गई है और कहा गया है कि सरकार को श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए गैर-रणनीतिक और घाटे की आशंका वाली संस्थाओं के विनिवेश, निजीकरण या यहां तक ​​कि बंद करने पर विचार करना चाहिए।

इसमें कहा गया है कि सरकारी खजाने पर बोझ कम करने और राज्य की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ऐसे सुधार आवश्यक थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी सहायता जारी रहने के बावजूद सरकार के स्वामित्व वाले उद्यमों का कुल घाटा 2021-22 में 42,930 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 72,851 करोड़ रुपये हो गया है।

भाषा

शुभम माधव

माधव