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मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में आग से पांच की मौत, मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने जताया शोक

(तस्वीरों के साथ)

मुजफ्फरपुर (बिहार), चार जून (भाषा) बिहार में मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में एक निजी अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में बृहस्पतिवार तड़के भीषण आग लगने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। एक वरिष्ठ जिला अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के शशांक कुमार (30 ), कृष्णानंदन सिंह (76) और गीता देवी (60), शिवहर जिले के उदय कुमार (57) तथा सीतामढ़ी जिले की संजीत कुमार (33) के रूप में हुई है।

नगर आयुक्त ऋतुराज सिंह ने कहा, ‘‘अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई अन्य लोग घायल हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।’’

इससे पहले, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने बताया था कि सुबह घटना की सूचना मिलने पर मृतकों की संख्या तीन थी।

उन्होंने बताया कि आईसीयू में लगभग 13 से 15 मरीजों का इलाज चल रहा था, जिन्हें उनके परिजन अन्य अस्पतालों में ले गए हैं।

जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘हम मरीजों के परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं। आग पर काबू पा लिया गया है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।’’

प्रसाद अस्पताल के प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर आशंका है कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी और तेजी से फैल गई, जिससे आईसीयू में धुआं भर गया और मरीजों को बाहर निकालने में काफी कठिनाई हुई।

लापरवाही के सवाल पर नगर आयुक्त ऋतुराज सिंह ने पत्रकारों से कहा कि जिलाधिकारी ने मामले की गहन जांच के लिए अपर समाहर्ता (एडीएम), अनुमंडल अधिकारी (एसडीएम), अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) एवं अन्य अधिकारियों की पांच सदस्यीय टीम गठित की है।

उन्होंने कहा, ‘‘जांच दल की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी।’’

इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना को ‘‘अत्यंत दुखद’’ बताया और मृत व्यक्तियों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मृत व्यक्तियों के परिवारों को तत्काल चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह अनुदान राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और घायलों के उपचार के लिए जिला अस्पतालों में समुचित व्यवस्था की गई है।’’

उपमुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने कहा कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और सरकार इस मामले में उचित कार्रवाई करेगी।

इस बीच, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बृहस्पतिवार को दिल्ली रवाना होने से पहले पत्रकारों के सवालों पर कोई टिप्पणी नहीं की।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल में आग लगने से हुई जनहानि से मैं अत्यंत दुखी हूं। मैं दिवंगत आत्माओं की शांति तथा शोकाकुल परिजनों को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी करता हूं।’’

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस घटना को हृदयविदारक बताया और मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ मुजफ्फरपुर जिले के एक निजी अस्पताल में आग लगने से हुई जनहानि अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।’’

जदयू विधायक दल के नेता और राज्य सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह घटना बेहद दुखद है। सरकार इसकी जांच कराएगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस योजना बनाई जाएगी।’’

इस घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि मुजफ्फरपुर में हुई इतनी बड़ी घटना के बावजूद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार दिल्ली दौरे पर हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को अपना दिल्ली दौरा रद्द कर बिहार आना चाहिए और राज्य के अस्पतालों की व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

डॉ. वर्धन ने आरोप लगाया कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही बदहाल स्थिति में है और अस्पतालों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर की घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर कर दिया है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस बीच, कुछ मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है और दावा किया है कि मृतकों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है।

अग्निकांड में अपने पिता को खोने वाले सत्याम कुमार ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, “आग लगने के दौरान आईसीयू में धुआं भर गया था। कुछ मरीज किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे।”

उन्होंने आरोप लगाया, “बाकी मरीज पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिए गए थे। अस्पताल के कर्मचारी घबराकर इधर-उधर भाग रहे थे। न तो अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था काम कर रही थी और न ही फायर अलार्म सिस्टम।”

इस घटना को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी बयान जारी कर राज्य सरकार पर हमला बोला। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव और एजाज अहमद ने कहा कि यह हादसा राज्य की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा है और सरकार की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हुई है।

राजद नेताओं ने कहा कि सरकारी उदासीनता और निगरानी की कमी के कारण मरीजों की जान लगातार जोखिम में पड़ रही है। उन्होंने घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य के सभी निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक मानकों का सख्ती से पालन हो, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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