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नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पुराने ट्रक और बस को बदलने की एक योजना को बुधवार को मंजूरी दे दी। इस कदम का उद्देश्य क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है।
इस योजना का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत उन ट्रक और बस के मालिकों को प्रोत्साहित करना है, जिनके वाहन बीएस-4 या उससे पहले के उत्सर्जन मानकों वाले हैं, ताकि वे अपने वाहनों को बीएस-6 या उससे अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) से बदल सकें।
एक बयान के अनुसार, केंद्र सरकार पांच साल के लिए ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, वाहनों की श्रेणी के आधार पर 4,800 रुपये तक के मासिक ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए एकमुश्त लाभ प्रदान करेगी।
इस योजना से दिल्ली और एनसीआर राज्यों-हरियाणा, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश- में लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों (1.91 लाख ट्रक और 16,329 बस) को लाभ होगा।
इस योजना पर कुल 9,585 करोड़ रुपये का व्यय होगा, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से 5,041 करोड़ रुपये तथा राज्यों द्वारा कर रियायतों के रूप में लगभग 1,601 करोड़ रुपये शामिल हैं।
यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह दो साल की योजना है जिसके तहत पुराने और बीएस-4 ट्रक और बस को उनके बीएस-6 मानकों के अनुरूप संस्करण से बदला जाएगा।
उन्होंने कहा कि शहरों और गांवों में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार ने कहा कि इस योजना को आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा तथा इसका क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
यह योजना हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली सहित भागीदार राज्यों के सहयोग से लागू की जाएगी।
बीएस-3 या उससे पुराने वाहनों के लिए पंजीकृत वाहन कबाड़ केंद्रों में ले जाकर कबाड़ में तब्दील करना अनिवार्य होगा, जबकि बीएस-4 वाहनों को या तो कबाड़ किया जा सकेगा या एनसीआर के बाहर गैर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) शहरों या कस्बों में बेचा जा सकेगा।
इसके बाद वाहन मालिकों को एनसीआर के भीतर बीएस-6 या उससे अधिक कड़े उत्सर्जन मानकों वाले अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदकर उनका पंजीकरण कराना होगा।
हालांकि, दिल्ली में इस योजना के तहत खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन केवल इलेक्ट्रिक होने चाहिए, जबकि बस केवल बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक होनी चाहिए। सरकारी वाहन इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
योजना के तहत, राज्य सरकारें नए वाहनों पर पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी तथा 10 वर्षों तक मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत तक छूट और पुराने वाहनों के लिए 50 प्रतिशत तक रियायत देंगी।
वे योजना में शामिल पुराने वाहनों की लंबित देनदारियों को भी माफ करेंगी। भागीदार ऑटो ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) एक्स-शोरूम कीमतों पर आठ प्रतिशत की छूट देंगे।
इस योजना का क्रियान्वयन एकीकृत पोर्टल के माध्यम से पूर्णतः डिजिटल होगा, जिससे वास्तविक समय में पात्रता जांच, स्वचालित ब्याज अनुदान दावे, मासिक ईंधन ‘वाउचर क्रेडिट’ और प्रदूषण कमी के परिणामों की निगरानी संभव होगी।
केंद्र सरकार के लाभ नए वाहन के पंजीकरण की तारीख से पांच वर्षों तक जारी रहेंगे।
योजना की निगरानी एक अधिकारप्राप्त समिति द्वारा की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करेंगे तथा इसमें नीति आयोग के सीईओ, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव, दिल्ली-एनसीआर के राज्यों के मुख्य सचिव सदस्य होंगे, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के सदस्य सचिव सदस्य-संयोजक होंगे।
जिला स्तर पर जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट को योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बयान में कहा गया कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण विशेषकर सर्दियों के महीनों में गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।
‘एनसीआर में कण पदार्थ (पीएम 2.5 और पीएम 10) का स्रोत निर्धारण’ नाम से 2018 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में परिवहन क्षेत्र द्वारा उत्पन्न प्रदूषण को रेखांकित किया गया था।
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार,परिवहन क्षेत्र की दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 के स्तर में 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड प्रदूषण में 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में 63 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
रिपोर्ट के मुताबिक परिवहन क्षेत्र में ट्रक और बस की हिस्सेदारी संख्या के लिहाज से महज तीन प्रतिशत है जबकि पीएम 2.5 उत्सर्जन में हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है।
अध्ययन के मुताबिक बीएस-4 वाहन बीएस-6 वाहन के मुकाबले 2.7 गुना अधिक उत्सर्जन करते हैं।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश