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सोना बेचने की खबरें गलत, भौतिक भंडार 880.52 टन पर स्थिर: आरबीआई

मुंबई, तीन जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोने की बिक्री की खबरों को बुधवार को खारिज करते हुए कहा कि भौतिक स्वर्ण भंडार में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 880.52 टन पर स्थिर बना हुआ है।

आरबीआई ने उन खबरों के बाद यह स्पष्टीकरण जारी किया है जिनमें दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के प्रभाव से विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा के लिए केंद्रीय बैंक ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है।

केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा, ‘‘ आरबीआई जोर देकर कहता है कि ये खबरें सही नहीं हैं।’’

उसने आम जनता को सलाह दी कि ऐसे मामलों में समय-समय पर आरबीआई द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।

इस बीच, पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने भी इन खबरों पर तथ्य आधारित जांच (फैक्ट-चेक) रिपोर्ट जारी की।

आरबीआई के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी सितंबर, 2025 के अंत में 13.92 प्रतिशत से बढ़कर 31 मार्च, 2026 को 16.70 प्रतिशत और 22 मई, 2026 तक 16.85 प्रतिशत हो गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक के पास 31 मार्च, 2026 तक कुल स्वर्ण भंडार 880.52 टन था, जो 31 मार्च, 2025 के 879.58 टन की तुलना में 0.94 टन अधिक है।

आरबीआई की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 880.52 टन में से 312.32 टन सोना निर्गम विभाग की परिसंपत्ति के रूप में रखा गया है जबकि 31 मार्च, 2025 को यह 311.38 टन था।

शेष 568.20 टन (जो 31 मार्च 2025 के समान है) बैंकिंग विभाग की परिसंपत्ति के रूप में दर्ज है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ बैंकिंग विभाग की परिसंपत्ति के रूप में रखे गए सोने (स्वर्ण जमा सहित) का मूल्य 31 मार्च, 2025 के 4,31,624.80 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च, 2026 को 7,06,162.36 करोड़ रुपये हो गया, जो 63.6 प्रतिशत की वृद्धि है।’’

इस वृद्धि की मुख्य वजह सोने की कीमतों में बढ़ोतरी और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट है।

आरबीआई आमतौर पर डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करता है। रुपया 20 मई, 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 33 पैसे टूटकर 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।

वैश्विक दबाव के बीच रुपया इस वर्ष एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गया है। यह लगभग सात प्रतिशत (2026 में अब तक) टूट चुका है और फरवरी के अंत में ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से करीब छह प्रतिशत कमजोर हुआ है।

यह दबाव महंगे कच्चे तेल, पूंजी निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण बना हुआ है।

भाषा निहारिका अजय

अजय