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हेगसेथ ने चीन को लेकर अपने बयानों में नरमी बरती, प्रशांत क्षेत्र के सहयोगियों को आश्वस्त किया

सिंगापुर, 30 मई (एपी) अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शनिवार को प्रशांत क्षेत्र के सहयोगी देशों को आश्वस्त किया कि अमेरिका इस क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा। हालांकि, उन्होंने चीन को खतरा बताने वाले अपने पहले के तीखे बयानों के मुकाबले इस बार कुछ नरमी बरती।

सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला सुरक्षा सम्मेलन में विश्व नेताओं, राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए हेगसेथ ने कहा कि प्रशांत क्षेत्र अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन की प्राथमिकता ‘‘प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को स्थायी और अनुकूल बनाए रखना है।’’

पिछले वर्ष उन्होंने इस सम्मेलन में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और ताइवान के प्रति उसके आक्रामक रुख को लेकर चेतावनी दी थी। लेकिन इस बार उनका रुख अपेक्षाकृत संयमित रहा। यह बदलाव ऐसे समय आया है जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच बीजिंग में बैठक हुई थी।

हेगसेथ ने कहा कि दोनों नेताओं ने रणनीतिक स्थिरता, निष्पक्षता और पारस्परिकता पर आधारित रचनात्मक संबंध बनाने पर सहमति जताई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के वर्चस्व को स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि चीन के अभूतपूर्व सैन्य विस्तार और क्षेत्र में उसकी गतिविधियों को लेकर चिंताएं जायज हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक शक्ति का प्रभुत्व क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ सकता है।

इस बीच, अमेरिकी सीनेटर टैमी डकवर्थ ने ट्रंप प्रशासन पर चीन के प्रति अत्यधिक नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें चिंता है कि अमेरिका हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धताओं से भटक रहा है।

ताइवान के मुद्दे पर हेगसेथ ने कहा कि ‘‘अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है’’, लेकिन संभावित हथियार सौदे पर निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप ही लेंगे।’’

वहीं, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, उसे समाप्त करने की नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियमों का पालन होने पर छोटे देशों की संप्रभुता और स्वतंत्र भूमिका सुरक्षित रहती है।

बीजिंग यात्रा के दौरान ट्रंप के साथ रहे हेगसेथ ने कहा कि दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई है कि चीन और अमेरिका को ‘निष्पक्षता एवं पारस्परिकता’ पर आधारित रणनीतिक स्थिरता का एक रचनात्मक संबंध बनाना चाहिए।

हेगसेथ ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को प्रभुत्व स्थापित करने से रोकना अब भी अमेरिका की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, ‘‘चीन के ऐतिहासिक सैन्य निर्माण और क्षेत्र तथा उससे परे उसकी सैन्य गतिविधियों के विस्तार को लेकर जायज चिंता है।’’

उन्होंने कहा कि ताइवान के प्रति अमेरिका के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन उन्होंने हथियार सौदे पर कोई टिप्पणी नहीं की।

हेगसेथ ने कहा, ‘‘जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा है, ताइवान को भविष्य में हथियार बेचने के बारे में कोई भी निर्णय उन्हीं पर निर्भर करेगा।’’

बाद में दिन में, चीनी मेजर जनरल मेंग जियांगकिंग ने शी और ट्रंप के बीच पिछले दिनों हुई बैठक के बारे में हेगसेथ की टिप्पणियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि नेताओं के बीच बनी सहमति ‘अगले तीन वर्षों और उससे आगे’ चीन-अमेरिका संबंधों के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगी।

सम्मेलन से इतर आयोजित एक कार्यक्रम में हेगसेथ, ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स, और ब्रिटिश रक्षा मंत्री जॉन हीली ने अपनी ‘ऑकस’ साझेदारी में एक नयी पहल की घोषणा की, जिसका प्राथमिक ध्यान परमाणु ऊर्जा संचालित पनडुब्बियों के विकास और निर्माण पर रहा है।

एपी संतोष नेत्रपाल

नेत्रपाल