नयी दिल्ली, 30 मई (भाषा) दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जाली चेक के जरिए एमिटी विश्वविद्यालय के बैंक खाते से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में मध्यप्रदेश से 58 वर्षीय एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के निवासी सुदामा नरवरे के रूप में हुई है। उसे वर्ष 2020 में आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज एक प्राथमिकी के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। प्राथमिकी में धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।
पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के उपायुक्त (डीसीपी) सुभाष कुमार गोस्वामी ने एक बयान में कहा, ‘‘यह मामला इलाहाबाद बैंक की संसद मार्ग शाखा के सहायक महाप्रबंधक की शिकायत पर दर्ज किया गया था। जांच के दौरान एमिटी विश्वविद्यालय के खाते से 6.25 करोड़ रुपये के फर्जी लेनदेन का पता चला था।’’
जांचकर्ताओं के अनुसार, अगस्त 2019 में विश्वविद्यालय की ओर से जारी बताए गए तीन चेक भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए थे।
इनमें से दो चेक का आईसीआईसीआई बैंक के माध्यम से भुगतान हो गया, और 5.20 करोड़ रुपये गुजरात और मध्यप्रदेश स्थित विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर दिए गए। तीसरे चेक को इंडसइंड बैंक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था, लेकिन भुगतान प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उसे रोक दिया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित बैंक रिकॉर्ड और खातों के विवरण की जांच की। इसमें पता चला कि 2.50 करोड़ रुपये का एक जाली चेक वडोदरा स्थित एनएस इंफ्रास्ट्रक्चर के खाते में जमा किया गया था, जबकि 2.70 करोड़ रुपये का दूसरा चेक बैतूल स्थित एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘मां ताप्ती मानव सेवा संस्थान’ के खाते में जमा किया गया।
पुलिस के अनुसार, नरवरे उक्त एनजीओ का सचिव और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता था।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि एनजीओ के खाते में राशि जमा होने के बाद नरवरे ने 2.07 करोड़ रुपये एक अन्य आरोपी के खाते में स्थानांतरित कर दिए। इसके बाद धनराशि को दिल्ली स्थित पांच कथित फर्जी कंपनियों सहित कई खातों के माध्यम से आगे भेजा गया।
जांच में यह भी सामने आया कि धोखाधड़ी से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया। कुछ धनराशि नकद निकाली गई, जबकि शेष रकम विभिन्न संस्थाओं को हस्तांतरित की गई, ताकि धन के स्रोत और उसके प्रवाह को छिपाया जा सके।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में तीन आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि नरवरे कई वर्षों तक फरार रहा और बाद में अदालत ने उसे घोषित अपराधी करार दिया था।
पुलिस के अनुसार, 12वीं कक्षा तक पढ़े नरवरे ने पहले एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के कार्यालय में काम किया था और उसे बैंकिंग प्रक्रियाओं की अच्छी जानकारी थी।
पुलिस ने बताया कि मामले में शेष आरोपियों का पता लगाने और कथित धोखाधड़ी में धन के पूरे प्रवाह का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।
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