जयपुर, 30 मई (भाषा) जयपुर के प्रमुख कैंसर रोग चिकित्सकों ने युवकों में तंबाकू सेवन की लत के कारण कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई और कहा कि इसको लेकर विशेषकर युवाओं में जागरुकता और समय पर जांच की जरूरत है।
भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल के वरिष्ठ ‘सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट’ डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि तंबाकू केवल मुख कैंसर ही नहीं, बल्कि फेफड़े, गले, भोजन नली, स्वरयंत्र, मूत्राशय और अन्य कई प्रकार के कैंसर का प्रमुख कारण है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के संदर्भ में अस्पताल के ‘रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट’ डॉ. नरेश जाखोटिया ने बताया कि कैंसर के लगभग एक-तिहाई मामलों को केवल तंबाकू से दूरी बनाकर रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि तंबाकू छोड़ने के कुछ वर्षों बाद ही कैंसर और हृदय रोगों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
डॉ. जाखोटिया ने बताया कि अस्पताल की कैंसर रजिस्ट्री में 2025 में 15,116 नए मरीज दर्ज किए गए जिनमें 26 प्रतिशत से अधिक मरीज मुंह एवं गले के कैंसर से ग्रस्त थे।
अस्पताल के निदेशक (क्लिनिकल सर्विसेज) डॉ. एस.सी. काबरा ने कहा कि कैंसर रजिस्ट्री के ये आंकड़े राजस्थान में कैंसर के बदलते स्वरूप और तंबाकू से जुड़े कैंसरों के बढ़ते बोझ को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह स्थिति जनजागरूकता और समय पर जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है।’’
डॉ. जाखोटिया ने बताया कि गुटखा, खैनी और अन्य धुएं रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वालों में मुंह के कैंसर का खतरा सबसे अधिक होता है। उन्होंने कहा कि मुंह कम खुलना, बार-बार छाले होना, आवाज में बदलाव, लगातार खांसी तथा बिना कारण वजन कम होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
उन्होंने बताया कि 'पेसिव स्मोकिंग' भी कैंसर का खतरा बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार का एक सदस्य धूम्रपान करता है तो उसका धुआं अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
भाषा पृथ्वी राजकुमार
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