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बंगाल: ‘फर्जी हस्ताक्षर’ मामले में सीआईडी ​​ने अभिषेक को समन भेजा

कोलकाता, 30 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ​​ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को नोटिस जारी करके जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए कहा है।

यह नोटिस उन्हें विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए उस पत्र में पार्टी विधायकों के जाली हस्ताक्षरों के कथित इस्तेमाल की जांच के सिलसिले में दिया गया है, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया गया था।

सीआईडी ​​सूत्रों के अनुसार, यह नोटिस उन्हें सोमवार दोपहर एजेंसी के भवानी भवन मुख्यालय में पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश देने वाला समन है। यह नोटिस बनर्जी को उनके कालीघाट रोड स्थित आवास पर व्यक्तिगत रूप से सौंपा गया।

हालांकि, यह नोटिस कोलकाता की सड़कों पर डेढ़ घंटे की नाटकीय घटनाओं के बाद ही सौंपा गया, जिसने जनता का काफी ध्यान आकर्षित किया।

घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब राज्य सीआईडी ​​के पांच अधिकारियों की एक टीम दोपहर लगभग 1.25 बजे दक्षिण कोलकाता के हरीश मुखर्जी रोड स्थित 188ए पर स्थित बनर्जी के आवास, जिसका नाम शांतिनिकेतन है, पर पहुंची, लेकिन नेता की अनुपस्थिति के कारण घर में प्रवेश करने में असफल रही।

अधिकारियों को बनर्जी के आवास पर तैनात एक कर्मचारी से यह कहते हुए सुना गया कि वे गृह स्वामी को नोटिस देने आए हैं और वे लगभग 30 मिनट तक वहीं रुके रहे।

इसके बाद टीम को नेता के कालीघाट रोड पर पास में ही स्थित वैकल्पिक आवास पर भेजा गया, जहां बनर्जी के कार्यालय के कर्मचारियों को समन सौंपने से इनकार करने पर अधिकारियों को लगभग 10 मिनट तक बाहर इंतजार करना पड़ा।

अधिकारियों ने टीएमसी सांसद को नोटिस सौंपा, जिसकी प्राप्ति की उन्होंने पुष्टि की। इसके बाद दोपहर करीब 2:50 बजे सीआईडी ​​टीम रवाना हो गई।

जांच टीम के जाने के बाद बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने अभी तक नोटिस की सामग्री नहीं देखी है। मैं अपने वकीलों से सलाह लूंगा और उचित जवाब दूंगा। मैं जांच में हर संभव तरीके से सहयोग करूंगा।”

बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक बदले की भावना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीधा विरोध करने का नतीजा है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘मैं उनकी धमकियों के आगे नहीं झुकने वाला और मैदान नहीं छोड़ने वाला। मैं कोलकाता और दिल्ली दोनों जगह ईडी और सीबीआई का करीब 10-12 बार सामना कर चुका हूं। अब विधानसभा चुनाव में उनकी जीत के बाद, वे कोलकाता पुलिस, सीआईडी ​​और कोलकाता नगर निगम को भी मेरे पीछे लगाने के लिए तैयार हैं। उन्हें मुझे गिरफ्तार करने दीजिए... मैं भागने वाला नहीं हूं।’’

इस मामले की जड़ें 19 मई को विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए एक विवादास्पद पत्र में निहित हैं, जिस पर नवनिर्वाचित टीएमसी विधायकों में से लगभग 70 ने हस्ताक्षर किए थे। इस पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (कैबिनेट मंत्री के पद के समान) के रूप में समर्थन देने की पेशकश की गई थी।

इसके बाद राज्य विधानसभा सचिवालय ने कोलकाता के हरे स्ट्रीट पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि टीएमसी नेता नयना बनर्जी के हस्ताक्षर, जो उन्होंने विधायक के रूप में शपथ लेने के बाद किए थे, चट्टोपाध्याय के समर्थन पत्र में मौजूद हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते।

अपनी जांच के तहत सीआईडी ​​ने अब तक नयना बनर्जी, बोलपुर से विधायक चंद्रनाथ सिन्हा, बेलेघाटा से विधायक कुणाल घोष और कैनिंग-पूर्व के विधायक बहारुल इस्लाम सहित कई टीएमसी विधायकों से पूछताछ की है।

भाषा संतोष माधव

माधव