शिमला, 30 मई (भाषा) हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया है कि सरकारी नौकरी में शामिल होने से पहले अभ्यर्थियों के डोप परीक्षण को अनिवार्य बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने विभागों को इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
सुक्खू ने प्रशासनिक सचिवों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन से बचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने मादक पदार्थ ‘चिट्टा’ की तस्करी में शामिल पाए गए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा भी मांगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू करते हुए प्रतिबंधित पदार्थों के खिलाफ जन-आंदोलन शुरू किया है।
उन्होंने बताया कि 11 मई को सरकार ने उन 123 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जो मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों में संलिप्त पाए गए थे। इनमें से 31 कर्मचारियों को पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। इनमें पुलिस विभाग के 21 कर्मचारी थे।
मुख्यमंत्री ने विभागों से अनुकंपा के आधार पर रोजगार के इच्छुक आवेदकों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने को कहा ताकि लंबित मामलों पर निर्णय लिया जा सके।
कर्मचारी कल्याण उपायों की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी विभागों को बजट घोषणा के अनुरूप चतुर्थ श्रेणी के पेंशनभोगियों की लंबित ग्रेच्युटी और अवकाश के नकदीकरण का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सुक्खू ने विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की जानकारी भी मांगी, ताकि भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार ने 'जूनियर ऑफिस असिस्टेंट' (आईटी) के 500 पद भरने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हाल के तूफानों के कारण वन भूमि पर उखड़े या गिरे पेड़ों का आंकड़ा एकत्र करने के निर्देश भी दिए, ताकि उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर हटाया जा सके।
भाषा
प्रचेता पवनेश
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